संघर्ष से सफलता तक: राजीव रंजन की कहानी !- प्रो. प्रसिद्ध कुमार।


   

@ ज्ञान भवन ,पटना !

आज का दिन राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनीसाबाद के प्रांगण के लिए भी एक गौरवपूर्ण अध्याय लेकर आया है। मेरे भतीजे, राजीव रंजन, ने बिहार विद्युत विभाग में लेखापाल (Accountant) के पद पर योगदान देकर अपने और अपने परिवार के सपनों को एक नई उड़ान दी है।

राजीव ने इसी प्रतिष्ठित महाविद्यालय से बी.कॉम प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर अपनी अकादमिक श्रेष्ठता का प्रमाण दिया था, और फिर प्रथम प्रयास में ही सरकारी सेवा में सफलता का विजय पताका फहराया है। यह सफलता केवल एक नियुक्ति पत्र नहीं, बल्कि उनकी अथक साधना, तीक्ष्ण बुद्धि और अदम्य संकल्प का जीता-जागता प्रमाण है।


सेवाभाव का समर्पण


राजीव की प्रतिभा केवल अंकों और डिग्रियों तक सीमित नहीं रही। वह कंप्यूटर के जादूगर थे; एक ऐसी प्रतिभा जिसके कारण पंचायत से लेकर प्रखंड तक के लोगों के लिए वह साइबर संबंधी कार्यों के लिए एक विश्वसनीय सेतु बन गए थे। जिस सुगमता और निःस्वार्थ भाव से वह लोगों का काम करते थे, वह एक अमूल्य सामाजिक सेवा थी।

किंतु, अब दोनों भाई – राजीव और दो माह पूर्व रेलवे की नौकरी छोड़कर कोलकाता में कार्यरत उनके छोटे भाई गौरव – अपनी-अपनी कर्मभूमि की ओर अग्रसर हो चुके हैं, जिससे वह बहुमूल्य सेवा अब विराम लेगी। यह निश्चित रूप से क्षेत्र के लोगों के लिए एक छोटी-सी क्षति है, पर यह उनके उज्जवल भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है।


अभाव में भी अप्रतिम उत्थान


राजीव रंजन, जो कि मंझले भाई प्रदीप जी के सुपुत्र हैं, का यह उत्थान किसी प्रेरक गाथा से कम नहीं है। जीवन के अनेक झंझावातों को झेलते हुए, सीमित संसाधनों या यों कहें कि घोर अभावग्रस्त परिस्थितियों के दावानल से निकलकर, अपने दृढ़ निश्चय और एकमात्र उचित शिक्षा तथा सही मार्गदर्शन के संजीवनी के बल पर अपने पैरों पर खड़े हो जाना, असाधारण व्यक्तित्व को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि सच्ची लगन और शिक्षा का प्रकाश हर अंधकार को मिटा सकता है।

मेरी अनंत शुभकामनाएँ हैं कि राजीव रंजन इसी आत्मबल और मेधा के साथ जीवन की हर परीक्षा में उत्तीर्ण हों और अपने दम पर निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहें।


यह सफलता मेहनत की मिसाल है!




 

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