व्यक्तिगत क्षमता और स्वावलंबन का मार्ग !

  


​हर व्यक्ति के भीतर असीम और पूर्ण क्षमता छिपी होती है। यह पूरी तरह से स्वयं व्यक्ति की इच्छाशक्ति और उसके निर्णयों पर निर्भर करता है कि वह अपने जीवन को किस दिशा में ले जाना चाहता है। यदि वह चाहे, तो अपनी सोच और कर्मों से कल्पना से भी अधिक निचले स्तर पर गिर सकता है, और यदि संकल्प कर ले, तो ऊंचाइयों के उस शिखर को छू सकता है जिसकी कल्पना भी सामान्यतः असंभव लगती है।

​वास्तव में, पतन का मार्ग अत्यंत सुगम होता है, परंतु जीवन में ऊपर उठने की प्रक्रिया एक कठिन चढ़ाई की तरह है। जिस प्रकार किसी पर्वत की चढ़ाई करने में शारीरिक और मानसिक बल की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार जीवन में उन्नति और श्रेष्ठता प्राप्त करने में कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ता लगती है।

​इसके विपरीत, समाज में भीड़ के पीछे चलना बेहद आसान माना जाता है। बहुसंख्यक लोग उसी रास्ते पर चल पड़ते हैं जहाँ बाकी सब जा रहे हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में व्यक्ति को स्वयं का विवेक, बुद्धि और दिमाग नहीं लगाना पड़ता। वह बिना किसी अतिरिक्त प्रयास या जिम्मेदारी के बस प्रवाह के साथ बहता चला जाता है।

वास्तविक प्रगति और आत्म-विकास का मार्ग भीड़ से अलग हटकर, अपने विवेक का इस्तेमाल करने और कठिन चढ़ाई की चुनौती को स्वीकार करने से ही प्रशस्त होता है।

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