प्रतिशोध का नया व्याकरण: "तू नहीं, तो तेरी परछाई सही" ! ( कहानी)
. ठुकराए हुए अहम् की गूँज!
वह केवल एक शादी का प्रस्ताव नहीं था, आर्यन के लिए वह उसकी मर्दानगी और उसके अस्तित्व की स्वीकार्यता की कसौटी थी। बरेली की उस उमस भरी शाम, जब लड़की ने साफ़ शब्दों में उसके 'सिस्टम' और उसके प्रेम को ख़ारिज कर दिया, तो आर्यन के भीतर कुछ टूट गया। वह कोई कोमल हृदय प्रेमी नहीं था, जिसका दिल टूटता तो वह आँसू बहाता। वह एक ऐसे समाज का हिस्सा था जहाँ पुरुष का अहम् काँच के बर्तन से भी ज़्यादा नाज़ुक और नुकीला होता है—ज़रा सी ठेस लगते ही वह दूसरों को लहूलुहान करने की ताक में रहता है।
लड़की का 'ना' कहना आर्यन के दिमाग़ में एक अंतहीन गूँज बन गया। मनोविज्ञान कहता है कि जब किसी अत्यधिक आत्ममुग्ध (Narcissist) व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध अस्वीकार किया जाता है, तो उसका दिमाग़ उस अस्वीकृति को एक गहरे अपमान की तरह लेता है। वह अब उस लड़की को पाना नहीं चाहता था, वह उस परिवार को उसकी 'औकात' दिखाना चाहता था।
. एक विकृत प्रतिस्थापन
"तू नहीं तो तेरी माँ सही..." > यह महज़ एक जुमला नहीं था, यह उस विकृत सोच की पराकाष्ठा थी जहाँ संबंध और भावनाएँ विनिमेय स्तुएँ बन जाती हैं।
जब मुख्य लक्ष्य (लड़की) हाथ से निकल गया, तो आर्यन के अवचेतन मन ने उस चोट की भरपाई के लिए एक नया निशाना साधा—लड़की की माँ। मनोविज्ञान में इसे 'डिस्प्लेसमेंट' यानी अपनी कुंठा को किसी दूसरे माध्यम पर उतारना कहते हैं। लेकिन यहाँ यह विस्थापन क्रूरता और सामाजिक उपहास की चादर ओढ़े हुए था।
वह माँ को बहला-फुसलाकर, या अपनी चालाकियों के जाल में फँसाकर ले भागा। उसने लड़की से उसकी सबसे सुरक्षित आड़—उसकी माँ—को छीन लिया। यह लड़की को यह अहसास कराने का एक भयानक तरीका था कि 'तुमने मुझे ठुकराया, अब तुम ताउम्र उस रिश्ते की अजीबोगरीब परछाईं के साथ जियोगी जिसे मैं तुम्हारे घर के आँगन में छोड़ गया हूँ।'
बिखरते घर की आर्तनाद
पीड़िता के पिता के बयान में एक अजीब सी बेबसी और सामाजिक शर्म का मिश्रण था—"हमारी बेटी ने साफ़ मना कर दिया था... हमारी सिर्फ़ एक ही माँग है, हमें हमारी पत्नी वापस लौटाई जाए।"
इस एक वाक्य ने उस घर के भीतर मचे उस तूफ़ान को बयाँ कर दिया जहाँ मर्यादाएँ, रिश्ते और सामाजिक प्रतिष्ठा ताश के पत्तों की तरह ढह गए थे। पिता का दर्द उस औरत के खोने का तो था ही, साथ ही उस लोक-लाज का भी था जो इस अजीबोगरीब घटना के बाद उनके नाम के साथ जुड़ गई थी। पूरे इज़्ज़तनगर में अब बातें थीं, कानाफूसियाँ थीं, और सोशल मीडिया पर मीम्स की शक्ल में तैरती उनकी त्रासदी थी।
सिस्टम' का अजीब मोड़
—"भाई पूरा सिस्टम ही बदल दिया..."। लेकिन यह बदलाव कोई क्रांति नहीं था, यह मानवीय विवेक के पतन की एक और दास्तान थी। पुलिस अब आर्यन की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। कानून की फाइल में यह महज़ 'अपहरण का एक मामला' (IPC की धाराओं के तहत) दर्ज है, लेकिन मनोवैज्ञानिक धरातल पर, यह एक ठुकराए हुए इंसान के उस पागलपन की कहानी है जिसने एक पूरे हँसते-खेलते परिवार के भूगोल और इतिहास को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया।

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