अनुच्छेद 368 संवैधानिक उपचारों का उपचार है। प्रसिद्ध यादव।

  


     अनुच्छेद 368 (1) संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्रदान करता है । अनुच्छेद यह कहता है कि इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी संसद अपनी संविधायी शक्ति का प्रयोग करते हुए इस संविधान के किसी उपबन्ध का परिवर्द्धन परिवर्तन या निरसन के रूप में इस अनुच्छेद में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुसार संशोधन कर सकेगी ।

खण्ड (2) यह कहता है कि संविधान के प्रत्येक संशोधन विधेयक संसद के प्रत्येक सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा तथा उस सदन के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित किया जायेगा किन्तु यदि संशोधन (क) अनुच्छेद 54 से 55, 73, 162 या 241 में (ख) या अनुच्छेद 73, 162 में, (ग) अनुच्छेद 124 से 147, 214, 231, 241, (ग) अनुच्छेद 13 की कोई बात अनुच्छेद 368 के अधीन किये गये संशोधन को लागू नहीं होगी ।


इस प्रकार संशोधन की दृष्टि से संविधान के विभिन्न उपबन्धों को तीन भागों में विभाजित किया जाता है और प्रत्येक भाग के लिए पृथक् प्रक्रिया अपनाई गयी है ।


(1) साधारण बहुमत:


इस श्रेणी में अनुच्छेद 4, 169 और 293-A आते हैं । इसमें संशोधन के लिए संसद का साधारण बहुमत पर्याप्त है । इन अनुच्छेदों को अनुच्छेद के 368 के क्षेत्र से परे रखा गया है; क्योंकि ये विषय कोई विशेष संवैधानिक महत्त्व के नहीं हैं ।


(2) विशेष बहुमत:


इसमें संविधान के अन्य सभी उपबन्ध आते हैं, जो नं॰ (1) और (3) में सम्मिलित नहीं हैं । इन उपबन्धों के संशोधन के लिए केवल ससद का विशेष बहुमत पर्याप्त है । यह राज्यों के उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से होता है ।


(3) विशेष बहुमत तथा राज्यों द्वारा अनुसमर्थन-इस श्रेणी में वे उपबन्ध आते हैं, जो संघात्मक ढांचे से सम्बन्धित हैं । इन उपबन्धों के संशोधन के लिए सबसे कठिन प्रक्रिया अपनायी गयी है । इसमें संशोधन के लिए ससद के प्रत्येक सदन के दो-तिहाई सदस्यों का बहुमत तथा कम-से-कम 50 प्रतिशत राज्यों के विधानमण्डलों का अनुसमर्थन भी आवश्यक है ।


निम्नलिखित उपबन्धों के संशोधन के लिए विशेष बहुमत और राज्यों का अनुसमर्थन आवश्यक है:


(1) राष्ट्रपति का निर्वाचन (अनुच्छेद 54-55)


(2) संघ तथा राज्यों की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार (अनुच्छेद 73,162)


(3) संघ तथा राज्य न्यायपालिका (अनुच्छेद 124-147, 214-231, 241)


(4)संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्ति का वितरण (अनुच्छेद 245-255)


(5) संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व में (अनुसूची 4) या


(6) सातवीं अनुसूची की किसी सूची में या


(7) अनुच्छेद 368 के उपबन्धों में ।


संशोधन की प्रक्रिया:


अनुच्छेद 368 का खण्ड यह कहता है कि संविधान के संशोधन के लिए विधेयक किसी भी सदन में आरम्भ किया जा सकता है । जब वह विधेयक प्रत्येक सदन के कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा (अर्थात् 50 प्रतिशत से अधिक) तथा उसमें उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित कर दिया जाता है ।


तब यह राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा जो विधेयक पर अनुमति देने के लिए बाध्य होगा । विधेयक पर राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हो जाने पर संविधान उस विधेयक के निर्बन्धनों के अनुसार संशोधित हो जायेगा


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