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Showing posts from August, 2026

सुशासन की बलिवेदी पर 'सुशासन': जब बिहार में नौकरशाही भी अपराधियों के निशाने पर आ गई!

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  बिहार में 'सुशासन' का दावा लंबे समय से प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक मंचों का मुख्य नारा रहा है। लेकिन जब राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति इस कदर बिगड़ जाए कि जनता की रक्षा और नीति-निर्माण में लगे प्रशासनिक अधिकारी ही सुरक्षित न रहें, तो इस 'सुशासन' की खोखली दीवारों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। औरंगाबाद में कार्यपालक पदाधिकारी (EO) की दिन-दहाड़े या निर्मम हत्या ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राज्य में कानून का डर लगभग समाप्त हो चुका है और अपराधी बेखौफ होकर अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। औरंगाबाद में EO की हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि यह राज्य के प्रशासनिक इक़बाल पर करारा तमाचा है। जिस व्यवस्था में अधिकारी अपनी जान की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहें, वहाँ आम जनता न्याय और सुरक्षा की उम्मीद किससे करे? जब विकास योजनाओं को लागू करने वाले और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने वाले अफसरों की आवाज गोलियों की गूँज से दबा दी जाती है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि सत्ता का नियंत्रण नेताओं के हाथों से फिसलकर 'समानांतर सत्ता' चलाने वाले अपराधियों के हाथों में चला गया है। और...

हमारी अनदेखी प्रेम कहानी: जहाँ हम जैसे हैं, वैसे ही स्वीकारे जाते हैं! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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    रोमांटिक फिल्मों और चर्चित उपन्यासों ने सदियों से हमें यही सिखाया है कि प्रेम में दो लोग एक-दूसरे को ‘पूरा’ करते हैं और एक-दूसरे की ‘दुनिया’ बन जाते हैं। लेकिन किसी की पूरी दुनिया बनने का प्रयास केवल एक मुगालता है—यह मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद थका देने वाला सफ़र है। जीवन के रंगमंच पर हर रिश्ते की अपनी माँगें और शर्तें होती हैं: रोमांटिक प्रेम बराबरी की साझेदारी और निरंतर अपेक्षाओं की माँग करता है। माता-पिता होना आपसे धैर्य का कभी न समाप्त होने वाला महासागर बनने को कहता है। कार्यक्षेत्र आपसे हर पल कुशल, पेशेवर और त्रुटिहीन रहने की उम्मीद रखता है। लेकिन दोस्ती—शायद यह दुनिया का इकलौता ऐसा रिश्ता है, जो एक सक्षम और समझदार वयस्क के मुखौटे के पीछे छिपे हमारे अधूरे, थोड़े सिरफिरे और बेहद कच्चे रूप को बिना किसी शर्त के गले लगा लेता है। मौन को समझने वाला सच्चा निस्वार्थ संबल शास्त्रीय उक्ति—“जो न होइ मित्र  के दुख से  दुखारी...”—आज के आधुनिक युग में भी उतनी ही चरितार्थ होती है जितनी सदियों पहले थी। सच्चा मित्र वह है जो बिना एक शब्द सुने आपकी मनःस्थिति, परिस्थितियों ...

'She Walks in Beauty' . - Lord Byron. Poem.

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  ये अंग्रेजी की कविता आज भी मुझे बहुत रोचक लगती है।  इस प्रसिद्ध कविता के कवि लॉर्ड बायरन हैं, जिनका पूरा नाम जॉर्ज गॉर्डन बायरन (George Gordon Byron) था। वे अंग्रेजी साहित्य के प्रमुख 'रोमांटिक युग' (Romantic Era) के कवियों में से एक हैं।  यह कविता 1814 में लिखी गई थी और बाद में 1815 में उनके संग्रह 'हेब्रू मेलोडीज़' (Hebrew Melodies) में प्रकाशित हुई। यह कविता एक वास्तविक घटना से प्रेरित है। जून 1814 में लॉर्ड बायरन लंदन में एक पार्टी (बॉल डांस) में शामिल हुए थे। वहाँ उनकी मुलाकात अपनी चचेरी बहन (बॉस/रिश्तेदार की पत्नी) श्रीमती जॉन विल्मॉट से हुई। उस समय श्रीमती विल्मॉट एक गहरे रंग की (काली) पोशाक पहने हुई थीं, जिस पर चमकीले सितारे/स्पैंगल्स लगे हुए थे। उनकी यह सुंदरता शांत, सौम्य और अद्वितीय थी। उनके इस रूप और मासूमियत से प्रभावित होकर बायरन ने अगले ही दिन यह कविता लिख दी। इस कविता का मुख्य भाव "आंतरिक और बाह्य सुंदरता का सुंदर सामंजस्य" है। कवि महिला की तुलना साफ़, तारों भरी रात से करता है। जिस तरह रात में अंधेरे और रोशनी का एक संतुलित मिश्रण होता है, उसी...