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Showing posts from September, 2026

भारत में बढ़ता घरेलू कर्ज: उपभोग, चुनौतियाँ और macroeconomic प्रभाव.

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    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आँकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक भारत का घरेलू कर्ज (household debt) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 45.5% हो गया है, जो जून 2023 में 42% और 2021 में 39.2% था. इस तेज वृद्धि ने नीति निर्माताओं और विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है.   ​बचत में गिरावट: कोविड-19 महामारी के बाद से घरेलू शुद्ध वित्तीय बचत में गिरावट आई है और वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में यह बढ़कर GDP का 6% हो गई है.   ​कर्ज के कारण: असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्मों के कारण कर्ज लेना आसान हो गया है, जिससे उपभोग को अस्थायी बढ़ावा तो मिलता है लेकिन भविष्य की आय गिरवी रखनी पड़ती है.   ​आर्थिक प्रभाव: यदि कर्ज का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य या आवास जैसी संपत्ति-निर्माण (asset-building) गतिविधियों के लिए किया जाए तो यह चिंता का विषय नहीं है; परंतु दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए कर्ज लेना वित्तीय जोखिम पैदा करता है.   ​सरकार और नीति निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना है कि कर्ज तक आसान पहुँच को बेहतर आर्थिक कल्याण मे...

भारत और इफ़्टा (EFTA) समझौता: आर्थिक विकास और तकनीकी सहयोग की नई राह.

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    अक्टूबर 2025 में भारत और यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA - जिसमें आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं) के बीच ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) लागू हुआ. इस समझौते के तहत भारत ने अपने टैरिफ लाइनों पर महत्वपूर्ण रियायतें दी हैं, जबकि इफ़्टा ने भारत में 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों के सृजन का लक्ष्य रखा है.   ​इस साझेदारी के मुख्य तीन प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं: ​भू-थर्मल ऊर्जा (Geothermal Energy): आइसलैंड के इस क्षेत्र के अनुभव का उपयोग भारत (विशेषकर हिमाचल प्रदेश) में कृषि और शीत भंडारण (cold storage) जैसी सुविधाओं के लिए किया जा रहा है.   ​कार्बन कैप्चर और यूटिलाइजेशन (CCUS): नीति आयोग के अध्ययन और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से देश में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए तकनीकी रोडमैप तैयार किया गया है.   ​समुद्री अर्थव्यवस्था (Ocean Economy): आइसलैंड की मत्स्य पालन और समुद्री मूल्य-वर्धन (value-added processing) की विशेषज्ञता से भारत को अपनी नीली अर्थ...

पर्यावरण बनाम विकास: अरावली का विनाश और संवैधानिक संकट।

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  अरावली पर्वत श्रृंखला, जो गुजरात से लेकर दिल्ली तक लगभग 700 किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है, उत्तर भारत के लिए केवल पहाड़ नहीं बल्कि एक प्राकृतिक ढाल और जीवनरेखा है। यह प्राचीन पर्वत श्रृंखला थार मरुस्थल को आगे बढ़ने से रोकती है, भूजल स्तर को बनाए रखती है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को प्रदूषण व जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों से बचाती है। हाल ही में अरावली क्षेत्र में खनन और टेंडर से जुड़े मामलों को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है, जो पर्यावरण संरक्षण के दावों और धरातल पर हो रहे कारनामों के बीच एक बड़ा विरोधाभास पैदा करती है।    क्या यह संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन है? अरावली के अंधाधुंध दोहन और खनन की अनुमति या टेंडर दिए जाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान के कई बुनियादी प्रावधानों और मौलिक अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन प्रतीत होती है: अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार): उच्चतम न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक फैसलों (जैसे एमसी मेहता वाद) में स्पष्ट किया है कि 'जीने के अधिकार' के अंतर्गत ही स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी और प्रदूषणमुक्त पर्यावरण का अधिकार भी शामि...

रीतिकरण से परे: भारतीय उच्च शिक्षा में तार्किकता और अकादमिक स्वतंत्रता की चुनौती।

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     आधुनिक शैक्षणिक संस्थान ज्ञान की खोज, प्रयोग और आलोचनात्मक दृष्टिकोण के मंदिर होते हैं, न कि अंधभक्ति या कर्मकांड के केंद्र. वर्तमान समय में भारतीय शिक्षा जगत में तार्किकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की जगह धार्मिक अनुष्ठानों और सामंती परंपराओं को बढ़ावा दिया जा रहा है. आईआईटी (IIT) जैसे प्रमुख संस्थानों में दीक्षांत समारोहों के दौरान प्राचीन परंपराओं और प्रतीकों का समावेश अकादमिक स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों के विपरीत है. विश्वविद्यालयों में बढ़ती सरकारी दखलअंदाजी, वैचारिक संकीर्णता और आलोचनात्मक आवाज़ों के दमन से संस्थानों की स्वायत्तता खतरे में पड़ रही है. 'फ्री टू थिंक 2026' की रिपोर्ट के अनुसार भारत में अकादमिक स्वतंत्रता को 'गंभीर रूप से प्रतिबंधित' श्रेणी में रखा गया है. रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों के अनुरूप हमें विश्वविद्यालयों को अंधविश्वास और राजनीतिक चापलूसी का अखाड़ा बनने से बचाना होगा, तथा उन्हें स्वतंत्र विचार और लोकतांत्रिक मूल्यों का केंद्र बनाना चाहिए.    #AcademicFreedom #HigherEducation #ScientificTemper #IndianAcademia #CriticalThinking #Fre...

मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा के ओछे बोल और विकृत मानसिकता: संवैधानिक पदों पर बैठकर समाज बांटने की खुली छूट नहीं मिल सकती।

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   खुद जैसे खेत की मूली समझते हो यादव को। ये प्रेम की बाँसुरी बजता है और दुष्टों को नरसंहार करने के लिए सुदर्शन चक्र भी।  ​बिहार की राजनीति में राजनेताओं द्वारा अपनी भाषाई मर्यादा भूलकर अमर्यादित और समाज को खंडित करने वाले बयान देने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला बिहार सरकार के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा के उस बेहद गैर-जिम्मेदाराना और आपत्तिजनक बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने एक पूरे सम्मानित समाज को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक शब्दावली का इस्तेमाल किया। जब सत्ता के गलियारों में बैठे लोग ही इस तरह की ओछी भाषा का प्रयोग करने लगें, तो यह लोकतंत्र के माथे पर एक गहरा कलंक बन जाता है। ऐसी रुग्ण और संकीर्ण मानसिकता रखने वाले व्यक्ति को एक पल भी मंत्रिमंडल में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है, और उन्हें अविलंब बर्खास्त किया जाना चाहिए। ​राजनीतिक अवसरवादिता और दोहरे मापदंड ​यह बेहद विडंबनापूर्ण और हास्यास्पद है कि एक तरफ उन्हीं की पार्टियों और गठबंधनों में यादव समाज के नेता अहम पदों पर काबिज हैं—चाहे भाजपा की ओर से नित्यानंद राय और राम कृपाल यादव हों, या जदयू क...

बीमा क्षेत्र की कमजोरियां: गलत प्रथाओं के लिए कोई 'बीमा' नहीं।

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    ​बीमा क्षेत्र में आयोगों  और ओवरराइडिंग कमीशन (ORC) को लेकर नियमों में कई खामियां और ओवरराइडिंग स्ट्रक्चर देखे गए हैं.   ​एग्रीगेटर्स और नए चैनलों के आने से कॉल सेंटर इंसेंटिव बढ़े, जिससे ग्राहकों को बिना मांगे उत्पाद बेचे गए और अवांछित पॉलिसियां थमा दी गईं.   ​IRDAI के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2013 से वित्त वर्ष 2023 के बीच बीमा पेनेट्रेशन 4.1% से गिरकर 3.7% रह गया, जबकि जीवन बीमा पेनेट्रेशन भी 3.1% से घटकर 2.7% हो गया.   ​कराधान अधिकारियों (tax authorities) द्वारा फर्जी बिलों के जरिए कर चोरी (tax fraud) के मामलों की जांच के बाद इस उद्योग में प्रतिष्ठा से जुड़े खतरे भी सामने आए.   ​एक ऐसा उद्योग जो खुद को आत्म-नियमित नहीं करता और उपभोक्ता को प्राथमिकता नहीं देता, उसे आने वाले समय में कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है.  

स्वास्थ्य सेवा में उपभोक्ता अधिकार: हम सिर्फ 'मरीज' नहीं, 'ग्राहक' भी हैं।

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  ​स्वास्थ्य सेवाओं को उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत 'सेवा' के दायरे में रखा गया है, जिसके तहत डॉक्टर और अस्पताल सेवा में कमी के लिए जवाबदेह हैं.   ​महाराष्ट्र के खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) के एक अध्ययन में चिकित्सा उपभोग्य सामग्रियों के खरीद मूल्यों और घोषित MRP के बीच 2,141% तक के भारी अंतर का खुलासा हुआ है.   ​स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या सूचना असंतुलन है, जहां मरीज अपनी कीमत, ब्रांड और गुणवत्ता की तुलना नहीं कर सकता.   ​उपभोक्ता आंदोलन का उद्देश्य 'डॉक्टर बनाम मरीज' का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और बीमाकर्ताओं के बीच सूचना और मोलभाव की शक्ति के अंतर को सुधारना है.   ​पारदर्शिता बढ़ाने के लिए हर अस्पताल के बिल को मशीन-पठनीय  बनाया जाना चाहिए और एल्गोरिदम के जरिए अत्यधिक मूल्य बदलावों की पहचान की जानी चाहिए.  

भारत का विभाजन कितने बार हुआ? अफगानिस्तान , नेपाल, भूटान , तिब्बत , बर्मा आदि भारत के ही अंग थे।

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      भारतीय इतिहास  पर अक्सर 'अखंड भारत' के टूटने और इसके कई बार विभाजित होने की चर्चाएं होती हैं। यदि ऐतिहासिक रूप से देखें, तो औपचारिक और मुख्य राजनीतिक विभाजन मुख्य रूप से 1947 (भारत और पाकिस्तान) तथा उसके बाद 1971 (बांग्लादेश का उदय) के रूप में दर्ज है। हालांकि, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान प्रशासनिक और रणनीतिक कारणों से भारतीय उपमहाद्वीप (अखंड भारत के भू-भाग) से कई पड़ोसी देशों और क्षेत्रों को अलग करने की प्रक्रिया को इतिहास के जानकारों द्वारा कई चरणों का विभाजन (लगभग 7 से अधिक बार) बताया जाता है।    यहाँ उन प्रमुख क्षेत्रों और देशों का विवरण दिया जा रहा है जो समय-समय पर ब्रिटिश काल या उसके आसपास मुख्य भू-भाग से प्रशासनिक रूप से अलग हुए और उनके प्रमुख धर्मों की स्थिति क्या है: प्रमुख विभाजित क्षेत्र, अलग होने का वर्ष और वहाँ के प्रमुख धर्म क्रम देश / क्षेत्र का नाम अलग होने का वर्ष (लगभग) मुख्य रूप से माने जाने वाले धर्म 1. अफगानिस्तान 1876 (गंधमार्क संधि के बाद) इस्लाम (बहुसंख्यक) 2. नेपाल 1904 (ब्रिटिश नीतियों के तहत अलग पहचान) हिंदू और बौद्ध धर्...

लोक-सेवा या लूट का उत्सव—व्यवस्था के आईने में एक प्रशासनिक विडंबना।

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      पटना ADM रविन्द्र कुमार दिवाकर और  इनकी पत्नी दानापुर की अवर निबंधक कुमारी स्वीटी के यहाँ छापे।  बिहार प्रशासनिक सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी और उनकी पत्नी के आवास पर हुई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) की कार्रवाई ने एक बार फिर व्यवस्था की चूलों को झकझोर कर रख दिया है। पटना के आपूर्ति अपर समाहर्ता (ADM) रविन्द्र कुमार दिवाकर और दानापुर की अवर निबंधक कुमारी स्वीटी के ठिकानों पर जब छापे पड़े, तो बरामद संपत्ति के आंकड़े ने आम जनमानस को अवाक कर दिया। डेढ़ करोड़ से अधिक की नगद राशि, भारी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण और सबसे दिलचस्प पहलू—48 कीमती घड़ियाँ! यह दृश्य उस गहरी सड़न को उजागर करता है जहाँ लोक-सेवक, जनसेवक न रहकर व्यवस्था के शोषक बन बैठते हैं। यह विडंबना नहीं तो और क्या है कि एक महीने में तीस दिन होते हैं, यदि कोई व्यक्ति हर रोज एक नई घड़ी भी बदले, तो भी महीने भर में तीस घड़ियाँ पर्याप्त होती हैं, फिर अड़तालीस घड़ियों का यह जखीरा किस मानसिक विलासिता का परिचायक है? यह संचय की वह प्रवृत्ति है जो नैतिक पतन की पराकाष्ठा को छूती है। द...

स्वास्थ्य और समय की असमानता: जब गरीबों के लिए समय बन जाता है दुर्लभ संपत्ति ।

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   सामाजिक असमानता एक अत्यंत गहरा और वास्तविक स्वरूप है, जो केवल धन या संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों—यानी 'समय' और 'स्वास्थ्य' पर भी सीधा प्रभाव डालती है। आर्थिक संपन्नता और समय की खरीद आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग अपनी क्रय शक्ति के बल पर जीवन को आसान बना लेते हैं। वे निजी अस्पतालों, भुगतान आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, पेशेवर एजेंटों और डिजिटल सहायता का उपयोग करके लंबी कतारों और प्रशासनिक झंझटों से बच जाते हैं और अपने लिए 'समय खरीद' लेते हैं। इसके विपरीत, सीमित आय वाले परिवारों के पास ऐसे कोई विकल्प नहीं होते हैं। आंकड़ों के आईने में स्वास्थ्य और सामाजिक असमानता विभिन्न रिपोर्ट्स और आंकड़े इस सामाजिक और स्वास्थ्यगत असमानता की पुष्टि करते हैं: जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) में अंतर: ऑक्सफैम और विभिन्न स्वास्थ्य अध्ययनों के अनुसार, आर्थिक रूप से संपन्न लोग देश के सबसे गरीब तबके की तुलना में औसतन 7.5 वर्ष अधिक जीते हैं। इसका मुख्य कारण गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी असमान पहुंच है। सबसे गरीब पांचवें हिस्से के लोगों की औसत ...

हृदय सम्राट और बेबाक वक्ता: प्रो. डॉ. अजय कुमार—संघर्ष, ईमानदारी और शिक्षकों के सच्चे मसीहा ! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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   राजनीतिक समीकरणों और सत्ता की पैंतरेबाज़ी के बीच कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने कर्म, निष्ठा और संवेदनशीलता के कारण इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि सीधे लोगों के दिलों में बस जाते हैं। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार और पटना कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस के गणित विभाग के अध्यक्ष (HOD) प्रो. डॉ. अजय कुमार आज ऐसे ही एक अनूठे जननायक के रूप में शिक्षकों के बीच चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। अध्यापन से जनसेवा तक का प्रेरणास्पद सफर एक उच्च विद्यालय के शिक्षक से लेकर कॉलेज के प्रोफेसर तक का उनका यह सफर उनकी अदम्य जिजीविषा, कड़ी मेहनत और अथक लगन की जीवंत दास्तान है। यह यात्रा साबित करती है कि यदि इरादे बुलंद हों और ईमानदारी आभूषण हो, तो सफलता की कोई सीमा नहीं होती। आत्मीय लगाव और अनुकरणीय कर्तव्यनिष्ठा प्रो. अजय कुमार का शिक्षकों के प्रति आत्मीय लगाव और सम्मान दुर्लभ है। परीक्षा केंद्रों पर मूल्यांकन के दौरान अक्सर शिक्षकों को मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ता है। ऐसे में, जब वे परीक्षा नियंत्रक के पद पर थे, तो उन्होंने व्यवस्था की इस कमी को अपनी जिम्मे...

वीआईपी संस्कृति और दिखावा: चुनाव आयोग की टेबल पर महंगे पानी की बोतलें।

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     करीब 500 रुपये प्रति लीटर पानी के बोतल पीते हैं।  हाल ही में निर्वाचन आयोग (EC) द्वारा साझा की गई एक बैठक की तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा और आलोचना का केंद्र बन गई है। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ अन्य दो चुनाव आयुक्त (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) नजर आए, लेकिन लोगों का ध्यान नीतिगत चर्चाओं से ज्यादा टेबल पर रखी 'आवा' (Aava) ब्रांड की पानी की छोटी कांच की बोतलों पर टिक गया। इन 250 मिलीलीटर की बोतलों की कीमत लगभग 125 रुपये प्रति बोतल (यानी करीब 500 रुपये प्रति लीटर) है, जो आम जनता द्वारा उपयोग किए जाने वाले सामान्य पानी के मुकाबले अत्यधिक महंगी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह ब्रांड प्राकृतिक मिनरल वाटर होने और अरावली रेंज की तरंगा पहाड़ियों से पानी उपलब्ध कराने का दावा करता है। जहां एक ओर देश में आम नागरिक बुनियादी और किफायती पानी का उपयोग करते हैं, वहीं संवैधानिक पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस तरह के महंगे और ब्रांडेड मिनरल वाटर का उपयोग वीआईपी संस्कृति और विलासिता को दर्शाता है। आलोचनात्मक दृष्टिकोण संवेदनशीलता का अभाव: संवैधान...

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) की नियुक्ति, निष्कासन और कानून।

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     मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और अन्य निर्वाचन आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति, निष्कासन और उन्हें प्राप्त कानूनी संरक्षण से जुड़े प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं: ​नियुक्ति प्रक्रिया: संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा बनाए गए कानून के आधार पर CEC और ECs की नियुक्ति की जाती है। 2023 के अधिनियम के तहत प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री की चयन समिति इनकी सिफारिश करती है।   ​निष्कासन के नियम: अनुच्छेद 324(5) के अनुसार CEC को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह साबित कदाचार या अक्षमता के आधार पर ही संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित निष्कासन प्रस्ताव और राष्ट्रपति के आदेश द्वारा हटाया जा सकता है।   ​गिरफ्तारी से संरक्षण: 2023 के अधिनियम की धारा 16 के तहत CEC या निर्वाचन आयुक्त को अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के लिए सिविल या क्रिमिनल कार्रवाई से संरक्षण प्राप्त है, लेकिन इसमें गिरफ्तारी या पुलिस हिरासत पर पूर्ण प्रतिबंध स्पष्ट रूप से द...

ज़हर के प्याले से शाही दावतों तक—राजनीति, भोजन और षड्यंत्रों का इतिहास ।

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    इतिहास केवल राजा-महारानी के युद्धों, संधियों या सिंहासन के संघर्षों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन थालियों और प्यालों का भी दस्तावेज़ है जिन पर हुक्मरानों की ज़िंदगी और मौत टिकी थी। राजनीति के गलियारों में 'खाना' हमेशा से कूटनीति का केंद्र रहा है। कहीं खानपान ने नेताओं को इतिहास में अमर कर दिया, तो कहीं भोजन में मिलाया गया ज़हर उनकी अकाल मृत्यु का कारण बना। 1. वे बड़े नेता, जिनकी मौत ज़हर या खाने में साजिश से हुई सत्ता की लालसा और राजनीतिक दुश्मनी में भोजन और पेय पदार्थों को हथियार बनाने की परंपरा पुरानी है। दुनिया और देश के इतिहास में कई ऐसे चर्चित नाम हैं जिनकी मौत ज़हर के जरिए हुई:    अलेक्जेंडर द ग्रेट (सिकंदर): महान विजेता सिकंदर की मौत को लेकर इतिहासकार लंबे समय से यह संदेह जताते रहे हैं कि बेबीलोन में एक शाही दावत के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और ज़हर दिए जाने के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी।    अलेक्जेंडर लिट्विनेंको (Alexander Litvinenko): आधुनिक इतिहास में रूसी जासूस से असंतुष्ट नेता बने लिट्विनेंको की लंदन के एक होटल में चाय में अत्यधिक रेडियोधर...

तार्किकता और वैज्ञानिक चेतना: विकसित राष्ट्र की अनिवार्य शर्त।

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  देश के विकास का पैमाना केवल ऊंचे भवनों या आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नैतिक मूल्यों पर भी निर्भर करता है। आज समाज और राष्ट्र के समक्ष यह एक गंभीर प्रश्न है कि क्या संकीर्णता और धर्मांधता के सहारे किसी देश को प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ाया जा सकता है? शिक्षा का वास्तविक स्वरूप और वर्तमान विसंगतियाँ शिक्षा केवल साक्षर होने या उपाधि प्राप्त करने का नाम नहीं है। एक ऐसी शिक्षा प्रणाली, जिसमें वैज्ञानिक सोच (Scientific Temper), तर्कशक्ति, नैतिकता, मानवीय संस्कृति और अच्छे संस्कार न हों, वह समाज को दिशा देने में असमर्थ है। रूढ़िवादिता और अंधविश्वास: आज खुद को शिक्षित कहने वाला वर्ग भी कई बार तार्किकता से दूर होकर रूढ़िवादिता और अंधी निष्ठा में लिفت दिखाई देता है। नैतिक पतन: जब शिक्षा से मूल्य और विवेक गायब हो जाते हैं, तब समाज केवल उपभोक्तावादी संस्कृति का केंद्र बनकर रह जाता है। जनसंचार और कला जगत की भूमिका पत्रकारिता, सिनेमा, डिजिटल मीडिया (यूट्यूब), साहित्य और कथाकार समाज के दर्पण माने जाते हैं। मुनाफाखोरी बनाम सामाजिक उत्तरदायित्व: आज...

​चिकित्सा जगत में मान बढ़ाया: डॉ. सुधीर कुमार को प्रतिष्ठित "Young Achiever Leader Award" से किया गया सम्मानित।

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​नई दिल्ली ।  ​मनुक्षी एडवांस फिजियोथेरेपिस्ट एवं रिहैबिलिटेशन सेंटर के डायरेक्टर, प्रख्यात फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सुधीर कुमार (PT) को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं, असाधारण नेतृत्व क्षमता और चिकित्सा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित "Young Achiever Leader Award" (IAP Excellence Awards 2026) से सम्मानित किया गया है। यह गौरवशाली सम्मान इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP) द्वारा प्रदान किया गया है। ​यह गरिमामयी सम्मान नई दिल्ली के अत्याधुनिक यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में आयोजित प्रतिष्ठित "World Physiotherapy Asia Western Pacific Regional Conference" (26-27 सितंबर 2026) के मंच पर प्रदान किया गया। ​यह उपलब्धि न केवल डॉ. सुधीर कुमार के लिए एक व्यक्तिगत मील का पत्थर है, बल्कि यह उनकी अनवरत साधना, व्यावसायिक उत्कृष्टता और उस अटूट कर्मनिष्ठा का जीवंत प्रमाण है, जो उन्होंने रोगियों के जीवन में आरोग्यता और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाने के लिए समर्पित की है। ​डॉ. सुधीर कुमार की यह प्रेरणादायक यात्रा चिकित्सा जगत के अन्य पेशेवरों और युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो यह सिद्...

दिखावे का फेर नहीं, विश्वसनीयता की जरूरत: भारतीय निर्वाचन आयोग की साख और सुधार।

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  The indian express की पत्रकार रितिका चोपरा को सैल्यूट!  भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की साख और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर हालिया संपादकीय और रिपोर्टों में गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। केवल निर्वाचन आयोग के अधिकारियों में फेरबदल करने से स्थिति में सुधार नहीं होगा, बल्कि आयोग को अपनी कार्यशैली में पारदर्शिता लाकर अपनी विश्वसनीयता साबित करनी होगी।    ट्रस्ट बनाम वर्थिनैस (विश्वास बनाम पात्रता): चुनाव आयोग लंबे समय तक केवल 'विश्वास' के सहारे चला है, न कि अपनी 'विश्वसनीयता' के प्रदर्शन पर। पिप्पा नॉरिस के अनुसार, विश्वास नागरिकों का एक आत्मपरक आकलन है, जबकि विश्वसनीयता संस्थान का वास्तविक प्रदर्शन और निष्पक्षता है।    चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी: मुख्य न्यायाधीश (CJI) को चयन पैनल से हटाकर प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को शामिल करने से आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। एक ऐसी चयन प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए जिसमें विपक्षी दल भी विश्वास जता सकें।    निर्णयों का आधार सार्वजनिक हो: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे महत्वपूर्ण मामलो...

‘पीरो के गांधी’ स्व. रामएकबाल सिंह वरसी की दसवीं पुण्यतिथि पर विशेष स्मृति समारोह आयोजित।

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    स्वतंत्रता सेनानी, पीरो के पूर्व विधायक और 1974 के छात्र आंदोलन के पुरोधा स्व. रामएकबाल सिंह वरसी की दसवीं पुण्यतिथि के अवसर पर पटना में एक भव्य ‘वरसी जी स्मृति समारोह’ का आयोजन किया जा रहा है।  आयोजन से जुड़ी मुख्य बातें तारीख व दिन: 4 अक्टूबर, रविवार (पुण्यतिथि से एक सप्ताह पूर्व) स्थान: गांधी संग्रहालय, पटना मुख्य आकर्षण: 'गांधी संग्रहालय' में 'पीरो के गांधी' (डॉ. राममनोहर लोहिया द्वारा दी गई उपाधि) के नाम और विचारों का अनूठा संगम।  आयोजनकर्ता एवं सहयोग मुख्य आयोजक: सोनांचल विकास परिषद सहयोगी संस्थाएं: मासिक पत्रिका 'वीरेंद्र यादव न्यूज' एवं 'वीरेंद्र यादव फाउंडेशन' विशेष जानकारी: सोनांचल विकास परिषद सोन नदी से सिंचित क्षेत्रों में सामाजिक कार्यों के लिए नवगठित संगठन है, जिसका यह पहला बड़ा कार्यक्रम है। आमंत्रण एवं महत्ता समाजवादी विचारधारा और जनहित से जुड़े सभी प्रबुद्ध नागरिकों व शुभचिंतकों को इस समारोह में सादर आमंत्रित किया जाता है। वरसी जी के कद और उनके व्यक्तित्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके अंतिम संस्कार में तत्कालीन मुख्यम...

कर्ज लेकर घी पीने की सियासत और बिहार का खाली खजाना: 2025 के बाद की आर्थिक हकीकत। _प्रो प्रसिद्ध कुमार, अर्थशास्त्र विभाग।

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   जब तक जिएं, सुख से जिएं, कर्ज लेकर भी घी पिएं।  बिहार की राजनीति में जुमलों और लोकलुभावन वादों का इतिहास पुराना है, लेकिन जब बात राज्य की तिजोरी और वित्तीय अनुशासन की आती है, तो तस्वीर बेहद चिंताजनक नजर आती है। साल 2025 के विधानसभा चुनाव में सत्ता की चाबी एक बार फिर एनडीए (NDA) के हाथों में आ गई। जनता ने सरकार पर भरोसा जताया, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वापसी आर्थिक मोर्चे पर स्थिरता की गारंटी दे पाई है? हालिया आंकड़े और CRISIL जैसी एजेंसियों की रिपोर्ट्स इस बात की गवाही देती हैं कि राजनीतिक जीत के बावजूद वर्तमान सरकार खजाने के मामले में फिसड्डी साबित हो रही है। 'ऋण लेकर घी पीने' वाली प्रवृत्ति और बढ़ता राजकोषीय घाटा भारतीय संस्कृति में कहावत है— "यावज्जीवेत् सुखं जीवेत्, ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्" ।बिहार के मौजूदा वित्तीय प्रबंधन पर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। चुनाव जीतने और मतदाताओं को लुभाने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर अंधाधुंध खर्च किया गया, जिसके लिए भारी-भरकम कर्ज का सहारा लेना पड़ा। परिणामस्वरूप, वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का राजकोषीय घाटा बढ़क...

न्याय और प्रचार के बीच की रेखा: भारतीय पुलिसिंग और मीडिया ब्रीफिंग की चुनौतियाँ।

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     भारत में किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद हथकड़ी लगाना, पुलिस द्वारा घेरा जाना और कभी-कभी अपराध का तख्तियां लिए घुमाने का चलन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाता है, जो अक्सर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से पहले ही होता है. सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) ने इस बात पर सवाल उठाया है कि भारतीय पुलिसिंग में इसके लिए कोई स्पष्ट कानूनी आधार या राष्ट्रव्यापी मीडिया प्रोटोकॉल नहीं है.    आरोपी व्यक्तियों की तस्वीरें प्रकाशित करने की अनुमति देने या रोकने वाला कोई एक विशेष कानून नहीं है, बल्कि यह औपनिवेशिक युग के नियमों और आपराधिक प्रक्रिया के सामान्य ढांचे पर आधारित है. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 84 (पूर्व में CrPC की धारा 82) भगोड़ों के लिए अदालत द्वारा उद्घोषणा की अनुमति देती है, लेकिन तस्वीरों के प्रकाशन के बारे में इसमें कुछ नहीं कहा गया है.    अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार और 'दोषी साबित होने तक निर्दोष' (Presumption of innocence) का सिद्धांत सर्वोपरि है. अदालतों ने यह माना है कि आरोप तय होने स...

भारतीय राजनीतिक वित्त पोषण का अंधेरा और सुधार की आवश्यकता।

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  भारतीय राजनीतिक वित्त पोषण की व्यवस्था में एक बड़ा विरोधाभास यह है कि चुनावी लोकतंत्र के मुख्य स्तंभ होने के बावजूद राजनीतिक दल संविधान में विशेष उल्लेख नहीं पाते हैं, सिवाय दसवीं अनुसूची के। इन्हें अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकारों के विस्तार के रूप में 'एसोसिएशन' (संघ) के रूप में देखा जाता है। राजनीतिक दलों के लिए न तो कोई कानूनी ढांचा तय किया गया है और न ही उन्हें कंपनी, ट्रस्ट, फर्म या गैर-लाभकारी संगठन के रूप में ढालने का कोई प्रयास किया गया है। इसके बावजूद, वे बेमिसाल और अभूतपूर्व तरीके से आयकर छूट का लाभ उठाते आ रहे हैं।    एसोशिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, FY2022-23 में RUPPs की घोषित आय में 223% की वृद्धि हुई। 2,764 RUPPs में से केवल 739 ने चुनाव आयोग (ECI) को अपने वित्तीय रिकॉर्ड जमा किए थे।    वेंकटेश नायक के एक शोध पत्र के अनुसार, 2024 के आम चुनाव के लिए 22 राजनीतिक दलों के पास कुल ₹18,742.31 करोड़ थे, जिसमें चुनाव की घोषणा के समय उनकी झोली में मौजूद धन और उसके बाद जुटाए गए चंदे शामिल हैं।    पिछले एक दशक में,...

अंधेर नगरी: जहाँ मुखिया के घर में ही बिकता है बहू रानी के हाथों कानून का जहर!

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  बहू निकली शराब तस्कर।  बिहार की धरा से एक बार फिर हैरान कर देने वाली और व्यवस्था को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। मुजफ्फरपुर जिले के मड़वन थाना क्षेत्र की बड़कागांव दक्षिणी पंचायत—जो विकास के दावे करने वाली धुरी होती है—वहाँ से जो सच निकला, उसने लोकतंत्र की नींव पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। जिस पंचायत की कमान मुखिया सुरेश प्रसाद गुप्ता के हाथों में थी, उसी घर के भीतर से उत्पाद विभाग की टीम ने उनकी बहू रानी कुमारी को शराब और बीयर की करीब 10 लीटर अवैध खेप के साथ धर दबोचा। सवाल यह उठता है कि जिस शराबबंदी कानून को सफल बनाने की सबसे बड़ी नैतिक जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों की होती है, यदि वही इसके सौदागर बन बैठें, तो आम जनता से क्या उम्मीद की जा सकती है? मुखिया जी अपनी सफाई में भले ही यह कह रहे हैं कि उनका बेटा असामाजिक तत्वों के दबाव में यह धंधा करता था और उन्होंने इसका हमेशा विरोध किया, लेकिन क्या यह स्वीकार्य है?  जब घर की चौखट के भीतर ही अवैध कारोबार का यह काला साम्राज्य फल-फूल रहा हो, तो मुखिया जी की इस दलील पर विश्वास करना सूरज को दीपक दिखाने जैसा है। शुरुआती ...

खाकी के खौफ का नंगा नाच: पुलिसिया बर्बरता के शिकार पीड़ित ने विपक्षी नेता के दरबार में लगाई न्याय की गुहार।

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(पीड़ित की फाइल फोटो)      बिहार के पटना जिले के रानीतलाब थाने से मानवता को शर्मसार कर देने वाली और खाकी की साख पर बट्टा लगाने वाली एक अत्यंत अमानवीय और बर्बर घटना सामने आई है। पीड़ित उपेंद्र कुमार (पिता- सिधनाथ राय, साकिन-  पतुत , थाना- रानीतलाब) के साथ जो कुछ हुआ, वह किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के मुंह पर एक करारा तमाचा है। यह घटना सिर्फ एक थाने की कार्यशैली पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि राज्य में कानून के राज की पोल खोलती है। इस सम्बन्ध में  मैं थाना अध्यक्ष रानी तालाब से बात करने की कोशिश की तो एक no बक्सर में किसी थाना प्रभारी के पास मौजूद था दूसरा no नहीं लग रहा था। यही दोनों no नेट पर मौजूद है।  क्या है पूरा मामला? प्राप्त विवरण और दस्तावेजी साक्ष्यों के अनुसार, दिनांक 21.09.2026 की रात्रि करीब 1.30 बजे रानीतलाब थाना पुलिस ने बिना किसी वारंट, उचित कारण या महिला पुलिस की मौजूदगी के पीड़ित के घर में जबरन घुसपैठ की। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के साथ अभद्र टिप्पणी व गाली-गलौज की और जब इसका विरोध किया गया, तो मोबाइल छीन लिया गया। इसके बाद पीड़ित को ...

निर्वाचन आयोग की साख और आंतरिक कलह पर गंभीर सवाल: सुधार जरूरी।

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   भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission) जो 1950 में अपनी स्थापना के बाद से देश की सबसे भरोसेमंद और प्रतिष्ठित संस्थाओं में गिना जाता था, आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। एक मीडिया जांच से यह उजागर हुआ है कि 3 सदस्यीय आयोग के भीतर अभूतपूर्व आंतरिक मतभेद चल रहे हैं, जहाँ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निर्णयों के खिलाफ आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज कराई हैं।    निर्णय लेने की प्रामाणिकता: रिपोर्ट ने तीन अहम सवाल खड़े किए हैं कि आखिर मुख्य फैसले कौन ले रहा है, मतदाता सूची (electoral roll) पर किसका नियंत्रण है, और किस अधिकार के तहत बड़े बदलाव किए जा रहे हैं?    पारदर्शिता का अभाव: आयोग ने न तो इन आंतरिक ज्ञापनों (memos) को सार्वजनिक किया और न ही यह स्पष्ट किया कि फॉर्म 6 में बदलाव, पश्चिम बंगाल में एसआईआर (SIR) विलोपन अपील दायर करने के निर्देश या गोवा में ईआरओ (EROs) द्वारा मतदाता सूची में संशोधन न कर पाने की स्थिति के लिए किसने अधिकृत किया था।    मतदाताओं के अधिकारों से खिलवाड़: मतदात...

दानापुर स्टेशन के बाहर अवैध वसूली का भंडाफोड़: खगौल पुलिस की बड़ी कार्रवाई।

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    दानापुर स्टेशन के बाहर अवैध वसूली (रंगदारी टैक्स) का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां निजी वाहनों के गुजरने पर भी जबरन पचास रुपये वसूले जाते थे। स्थिति यह थी कि इस रंगदारी टैक्स के डर से कई वाहन खगौल छोड़कर अन्य रास्तों से जाने को मजबूर थे, जिससे आम जनता के बीच एक प्रकार का खौफ पैदा हो गया था।    अवैध वसूली का आतंक: दानापुर स्टेशन के बाहर से गुजरने वाले निजी वाहनों को भी पार्किंग के नाम पर जबरन 50 रुपये देने पड़ते थे।    स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता: इस अवैध गतिविधि की सूचना जब स्थानीय थाने को दी गई, तो उनकी ओर से कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई। खगौल पुलिस की सराहनीय कार्रवाई: आखिरकार, खगौल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस अवैध वसूली का भंडाफोड़ किया और 7 आरोपियों को रंगे हाथ दबोच लिया।    जनता को राहत: इस कार्रवाई से आम चालकों और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है, जो इस अवैध खौफ के साए में सफर कर रहे थे। दानापुर एएसपी और खगौल थाना की इस सफलता और त्वरित एक्शन के लिए उन्हें बहुत-बहुत बधाई, जिन्होंने अपराधियों के इस अवैध नेटवर्क पर लगाम लगा...

लोकतंत्र की नींव पर प्रहार: फर्जी मतदान और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल।

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   पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में छह हजार से अधिक फर्जी मतदाता निकला।  भारतीय लोकतंत्र में चुनाव प्रणाली की पवित्रता ही देश की ताकत है। हाल ही में राहुल गांधी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में छह हजार से अधिक फर्जी मतदाताओं के सामने आने जैसे मामलों ने चुनावी व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।   चुनावी प्रक्रिया पर सवाल: राहुल गांधी द्वारा देश में फर्जी चुनाव होने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।    स्थानीय स्तर पर धांधली: पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में छह हजार से अधिक फर्जी मतदाताओं का पाया जाना इस बात का प्रमाण है कि यह समस्या जड़ तक फैल चुकी है। संविधान पर सीधा हमला: फर्जी वोटों के सहारे चुनाव जीतना लोकतांत्रिक व्यवस्था और देश के संविधान पर एक सीधा हमला है। जमानत जब्ती का प्रावधान: फर्जी वोट या प्रशासनिक धांधली के सहारे जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों की अब हर हाल में जमानत जब्त होनी चाहिए, ताकि ऐसे कृत्यों पर रोक लग सके। पारदर्शिता की बहाली: चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता साबित कर...

मनेर ने खो दिया राजद का एक मुखर स्तम्भ: अलविदा, पूर्व पार्षद ललन कुमार यादव!

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    ​मनेर की राजनीति और राजद परिवार के लिए यह एक बेहद मर्माहत करने वाली खबर है। मनेर नगर परिषद के पूर्व पार्षद और राष्ट्रीय जनता दल के समर्पित नेता ललन कुमार यादव अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका यूं अचानक चले जाना राजनीतिक गलियारों और उनके चाहने वालों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ​एक सच्चा सिपाही और पार्टी का स्तम्भ ​मुखर और मिलनसार व्यक्तित्व: ललन जी अपने मिलनसार स्वभाव और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे। राजद का कोई भी छोटा या बड़ा कार्यक्रम हो, उनकी सक्रिय उपस्थिति हमेशा ऊर्जा भर देती थी। ​संगठन के प्रति निष्ठा: पटना जिला राजद अध्यक्ष देवमुनि सिंह यादव के बाद, मनेर क्षेत्र में पार्टी की गतिविधियों और उसकी रीढ़ को मजबूत करने में ललन यादव एक बेहद प्रमुख चेहरा थे। ​विचारों की परिपक्वता: मनेर के राजद विधायक भाई वीरेंद्र और ललन जी एक ही गांव के थे और एक ही दल से जुड़े थे। वैचारिक मुद्दों पर कभी-कभी मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उनके बीच कभी मनभेद नहीं रहा—यह उनकी परिपक्वता और राजनीतिक शिष्टाचार की मिसाल थी। ​यादों के झरोखे से ​उनसे जुड़ी यादें आज भी ताजा हैं। कुछ समय पहले उनकी पुत्र...

RLSY College, Anisabad, Patna के NSS (National Service Scheme) कोऑर्डिनेटर प्रो. प्रसिद्ध कुमार की ओर से NSS दिवस पर शुभकामनाएं।

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  NSS के मध्यम से नशा मुक्त अभियान, पर्यावरण बचाओ, प्लास्टिक के उपयोग को न करने के लिए रैली, तिरंगा यात्रा, वृक्षारोपण आदि कार्यक्रम कॉलेज में प्रमुखता से चलाया गया। इसमें कॉलेज के प्राचार्य प्रो सुरेंद्र प्रसाद, उप प्रचार्या प्रो कुमारी संगीता सहित शिक्षक शिक्षाकेतर कर्मचारियों व स्टूडेंट्स ने प्रमुखता से भाग लिए व सहयोग किये।  राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, सेवा की भावना और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण विकसित करने का एक प्रमुख मंच है। आइए NSS के मुख्य कार्यों, इसके संचालन की प्रक्रिया और इससे होने वाले लाभों को विस्तार से समझते हैं: NSS के प्रमुख कार्य (Main Activities) सामुदायिक सेवा और विकास: गाँव या चयनित बस्तियों (स्लम एरिया) में जाकर स्वच्छता अभियान चलाना, स्वास्थ्य शिविर (Health Check-up Camps) और रक्तदान शिविर आयोजित करना। शिक्षा और साक्षरता: प्रौढ़ शिक्षा (Adult Education) कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षण शिविर लगाना। राष्ट्रीय दिवसों और जागरूकता अभियानों का आयोजन: एड्स जागरूकता (Red Ribbon...

साधना, समर्पण और सफलता का स्वर्णमयी शिखर: डॉ. सुधीर कुमार की गौरवशाली उपलब्धि। -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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    चिकित्सा का क्षेत्र केवल विज्ञान नहीं, अपितु मानवीय संवेदना और सेवा का एक पवित्र अनुष्ठान है। जब कोई निष्ठावान साधक इस मार्ग पर अपनी अदम्य ऊर्जा और असीमित संकल्पशक्ति के साथ आगे बढ़ता है, तो सफलता स्वयं उसके चरणों की वंदना करती है। यह अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP) द्वारा मनुश्री एडवांस फिजियोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (Manushree Advance Physiotherapy & Rehabilitation Center) के डायरेक्टर डॉ. सुधीर कुमार (PT) को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं एवं नेतृत्व क्षमता के लिए प्रतिष्ठित "Young Achiever Leader Award" (IAP Excellence Awards 2026) हेतु चयनित किया गया है।    🌟 एक प्रतिष्ठित मंच पर गौरवशाली सम्मान यह गरिमामयी सम्मान नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित "World Physiotherapy Asia Western Pacific Regional Conference 2026" के मंच पर प्रदान किया जाएगा। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सम्मान मात्र नहीं है, अपितु यह डॉ. सुधीर कुमार की उस अनवरत साधना, व्यावसायिक उत्कृष्टता और अटूट कर्मनिष्ठा का ...

साधना, समर्पण और सफलता का स्वर्णमयी शिखर: डॉ. सुधीर कुमार की गौरवशाली उपलब्धि। - प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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     चिकित्सा का क्षेत्र केवल विज्ञान नहीं, अपितु मानवीय संवेदना और सेवा का एक पवित्र अनुष्ठान है। जब कोई निष्ठावान साधक इस मार्ग पर अपनी अदम्य ऊर्जा और असीमित संकल्पशक्ति के साथ आगे बढ़ता है, तो सफलता स्वयं उसके चरणों की वंदना करती है। यह अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP) द्वारा डॉ. सुधीर कुमार (PT) को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं एवं नेतृत्व क्षमता के लिए प्रतिष्ठित "Young Achiever Leader Award" (IAP Excellence Awards 2026) हेतु चयनित किया गया है। यह गरिमामयी सम्मान नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित "World Physiotherapy Asia Western Pacific Regional Conference 2026" के मंच पर प्रदान किया जाएगा। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सम्मान मात्र नहीं है, अपितु यह डॉ. सुधीर कुमार की उस अनवरत साधना, व्यावसायिक उत्कृष्टता और अटूट कर्मनिष्ठा का जीवंत प्रमाण है, जो उन्होंने रोगियों के जीवन में आरोग्यता का प्रकाश फैलाने के लिए समर्पित की है। उनकी यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों और सहकर्मियों के लिए प्रेरणा का वह दीप...

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2027: पूरा शेड्यूल और चयन प्रक्रिया। प्रो प्रसिद्ध कुमार, कोर्डिनेटर NSS Rlsy college Anisabad Patna.

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    30 सितंबर 2026 तक 'माय भारत पोर्टल' (MY Bharat Portal) के माध्यम से 15 से 29 वर्ष के युवा ऑनलाइन पंजीकरण करें।  ​भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2027' के आयोजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। यह 15 से 29 वर्ष के युवाओं के लिए एक राष्ट्रीय मंच है, जिसके माध्यम से युवा देश के विकास और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संवाद में सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं। इस कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल नीचे आलेख के रूप में दिया गया है:  कार्यक्रम का चरणबद्ध शेड्यूल एवं तिथियां ​विकसित भारत क्विज़ (Viksit Bharat Quiz): यह पूरी चयन प्रक्रिया का पहला महत्वपूर्ण चरण है। 17 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक 'माय भारत पोर्टल' (MY Bharat Portal) के माध्यम से 15 से 29 वर्ष के युवा ऑनलाइन पंजीकरण करके इस क्विज़ में भाग ले सकते हैं। क्विज़ में भाग लेने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इसमें सफल होने वाले शीर्ष 10 प्रतिशत प्रतिभागी अगले चरण के लिए अर्हता प्राप्त करेंगे। ​विकसित भारत निबंध चुनौती (Essay Challenge): क्विज़ में सफल प्रतिभ...

खगौल की धरती पर खौफ का तांडव: क्या सोई हुई थी व्यवस्था?

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    दानापुर।  चलती ट्रेन से  यात्री को नीचे फेंक देता था  रोहित तिवारी!  ज्ञान और संस्कृति की भूमि कहे जाने वाले खगौल और उसके आसपास के क्षेत्रों में हाल ही में जो वीभत्स और दहला देने वाली घटना सामने आई है, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। खुद को पुलिस, आरपीएफ या एसटीएफ का जवान बताकर ट्रेन की दिव्यांग बोगी में यात्रियों को निशाना बनाने वाले रोहित तिवारी जैसे दरिंदे ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं।    फर्जी पहचान का आतंक: यह तथाकथित नर पिशाच खुद को सुरक्षा बल का अधिकारी बताकर यात्रियों पर जुर्माने का दबाव बनाता और विरोध करने पर उन्हें चलती ट्रेन से नीचे फेंक देता था।    बक्सर और अन्य स्थानों पर यात्रियों (जैसे कैलाश कुमार और अन्य) के साथ जो अमानवीय कृत्य किया गया, उसने चंबल के डाकुओं और कुख्यात अपराधियों के इतिहास को भी पीछे छोड़ दिया है।    आखिर भारतीय रेल और सुरक्षा एजेंसियां इतनी लापरवाह कैसे हो सकती हैं कि एक शातिर अपराधी लंबे समय तक ट्रेनों में खुलेआम इस तरह का षड्यंत्र रचता रहा और मासूमों की जान लेता रहा?  ...

क्या चुनाव आयोग के भीतर पारदर्शिता और स्वतंत्र कामकाज पर संकट के बादल हैं?

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  आयोग के भीतर मौजूद वह आंतरिक असहमति और पारदर्शिता का अभाव है, जो लोकतंत्र की नींव को मजबूत रखने वाले संस्थानों के लिए चिंता का विषय है।    10 महीनों की अवधि में 14 ऐसे अवसर आए जब निर्वाचन आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग द्वारा उठाए गए कदमों पर अपनी आपत्ति आधिकारिक रूप से दर्ज कराई।    आपत्ति के मुख्य कारणों में से एक यह था कि चुनाव आयोग के कई महत्वपूर्ण फैसलों और कदमों से अन्य आयुक्तों को अंधेरे में रखा गया, जिससे आंतरिक समन्वय और विश्वास पर सवाल उठते हैं।     विवाद का एक बड़ा दायरा नए मतदाताओं को जोड़ने और नामों को हटाने जैसी प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है, जो सीधे तौर पर चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित करता है।    स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस आंतरिक कलह और प्रणालीगत मतभेदों को सुलझाने के लिए मामलों को कैबिनेट सचिव के दरवाजे तक ले जाया गया।    चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि इस प्रकार के आंतरिक गतिरोधों को पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ सुलझाया जाए।...

अमेरिका और चीन का एआई समझौता: शेष दुनिया के लिए चिंता और चुनौतियाँ।

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  एआई मानकों पर समझौता: अमेरिका और चीन के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के मानकों को लेकर एक ऐसा समझौता होने जा रहा है जो बाकी दुनिया को 'नियम बनाने वाले'  के बजाय केवल 'नियम मानने वाला' बना सकता है।    प्रतिबंध बनाम मुक्त मॉडल: अमेरिका निर्यात नियंत्रण और भुगतान वाले बुनियादी ढांचे के माध्यम से प्रतिबंधों को मजबूत कर रहा है, जबकि चीन ब्रिक्स (BRICS) और वैश्विक दक्षिण  के माध्यम से सस्ते या मुफ्त ओपन-सोर्स मॉडल वितरित कर रहा है।    वैश्विक चिंताएं और भारत की स्थिति: अन्य देश और संगठन (जैसे जी7, नॉर्वे, फिनलैंड, सिंगापुर और यूरोपीय आयोग) पारदर्शी सुरक्षा और स्वतंत्र निगरानी की मांग कर रहे हैं। वहीं, ब्रिक्स अध्यक्ष और जी7  सहभागी के रूप में भारत दोनों पक्षों में शामिल है और उभरते बाजारों को नियम-निर्माण में वास्तविक स्थान दिलाने के लिए प्रयासरत है।    भविष्य की उम्मीद: यह आशंका बनी हुई है कि अमेरिका और चीन का यह विशेष समझौता एक निजी क्लब न बनकर सभी के लिए एक खुला मंच बने।    #AIStandards #USChinaRelations #ArtificialIntelligence ...

5000 ब्लॉग , 51 देशों के पाठक और 3 लाख 27 हजार+ व्यूअर्स का स्वर्णिम सफर: वैचारिक यात्रा का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर। — प्रो. प्रसिद्ध कुमार।

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    "जब शब्द वैचारिक स्वतंत्रता की मशाल लेकर आगे बढ़ते हैं, तो वे केवल लेख नहीं रहते, बल्कि एक जीवंत इतिहास और सामाजिक धरोहर बन जाते हैं।" एक ऐतिहासिक पड़ाव: 5000 ब्लॉग्स और 3.27 लाख पाठकों का कारवां आज का दिन (सितंबर 2026) मेरे लिए, मेरी लेखनी के लिए और इस वैचारिक मंच से जुड़े प्रत्येक पाठक के लिए अत्यंत गौरवशाली है। हाल ही में मिले आँकड़ों के अनुसार, मेरे ब्लॉग ने 5000 पोस्ट्स के ऐतिहासिक आंकड़े को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। इसके साथ ही, 'All Time' व्यूअर्स की संख्या 327,809 (327 हजार से ऊपर) पहुँच चुकी है। पाँच महादेशों और 51 से अधिक देशों के पाठकों का यह निरंतर प्रेम इस बात का प्रमाण है कि विचार भाषा और भूगोल की सीमाओं से परे होते हैं। विकास और प्रगति का तुलनात्मक विश्लेषण दिसंबर 2025 से सितंबर 2026 तक की इस यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि निष्पक्ष और निरंतर लेखन समाज में अपनी गहरी छाप छोड़ता है: - विवरण | पिछली स्थिति (दिसंबर 2025) | वर्तमान स्थिति (सितंबर 2026) | कुल वृद्धि / उपलब्धि - कुल पोस्ट्स | 4,300 | 5,000[ 700 नए वैचारिक लेख - कुल व्यूअर्स (All Time) | 2,69,...