अंधेर नगरी: जहाँ मुखिया के घर में ही बिकता है बहू रानी के हाथों कानून का जहर!

 





बहू निकली शराब तस्कर। 

बिहार की धरा से एक बार फिर हैरान कर देने वाली और व्यवस्था को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। मुजफ्फरपुर जिले के मड़वन थाना क्षेत्र की बड़कागांव दक्षिणी पंचायत—जो विकास के दावे करने वाली धुरी होती है—वहाँ से जो सच निकला, उसने लोकतंत्र की नींव पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

जिस पंचायत की कमान मुखिया सुरेश प्रसाद गुप्ता के हाथों में थी, उसी घर के भीतर से उत्पाद विभाग की टीम ने उनकी बहू रानी कुमारी को शराब और बीयर की करीब 10 लीटर अवैध खेप के साथ धर दबोचा। सवाल यह उठता है कि जिस शराबबंदी कानून को सफल बनाने की सबसे बड़ी नैतिक जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों की होती है, यदि वही इसके सौदागर बन बैठें, तो आम जनता से क्या उम्मीद की जा सकती है?

मुखिया जी अपनी सफाई में भले ही यह कह रहे हैं कि उनका बेटा असामाजिक तत्वों के दबाव में यह धंधा करता था और उन्होंने इसका हमेशा विरोध किया, लेकिन क्या यह स्वीकार्य है?  जब घर की चौखट के भीतर ही अवैध कारोबार का यह काला साम्राज्य फल-फूल रहा हो, तो मुखिया जी की इस दलील पर विश्वास करना सूरज को दीपक दिखाने जैसा है। शुरुआती छानबीन में यह भी सामने आया है कि मुखिया के बेटे मनीष कुमार पर पहले से ही शराब तस्करी के मामले दर्ज हैं। 

यह केवल एक घर या एक परिवार का मामला नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता पर तमाचा है जो सत्ता और पद की आड़ में कानून की धज्जियां उड़ाती है। जब रखवाले ही चोर बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? बिहार में पूर्ण शराबबंदी को सफल बनाने के लिए जहाँ पूरा प्रशासन जुटा है, वहीं ऐसे लोग व्यवस्था के माथे पर कलंक हैं।

"रखवाली को बैठाए थे जिन हाथों में पहरा,

आज उन्हीं के आँगन से निकला जहर का डेरा।"

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