भारत का विभाजन कितने बार हुआ? अफगानिस्तान , नेपाल, भूटान , तिब्बत , बर्मा आदि भारत के ही अंग थे।

     


भारतीय इतिहास  पर अक्सर 'अखंड भारत' के टूटने और इसके कई बार विभाजित होने की चर्चाएं होती हैं। यदि ऐतिहासिक रूप से देखें, तो औपचारिक और मुख्य राजनीतिक विभाजन मुख्य रूप से 1947 (भारत और पाकिस्तान) तथा उसके बाद 1971 (बांग्लादेश का उदय) के रूप में दर्ज है। हालांकि, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान प्रशासनिक और रणनीतिक कारणों से भारतीय उपमहाद्वीप (अखंड भारत के भू-भाग) से कई पड़ोसी देशों और क्षेत्रों को अलग करने की प्रक्रिया को इतिहास के जानकारों द्वारा कई चरणों का विभाजन (लगभग 7 से अधिक बार) बताया जाता है।   

यहाँ उन प्रमुख क्षेत्रों और देशों का विवरण दिया जा रहा है जो समय-समय पर ब्रिटिश काल या उसके आसपास मुख्य भू-भाग से प्रशासनिक रूप से अलग हुए और उनके प्रमुख धर्मों की स्थिति क्या है:

प्रमुख विभाजित क्षेत्र, अलग होने का वर्ष और वहाँ के प्रमुख धर्म

क्रम

देश / क्षेत्र का नाम

अलग होने का वर्ष (लगभग)

मुख्य रूप से माने जाने वाले धर्म

1.

अफगानिस्तान

1876 (गंधमार्क संधि के बाद)

इस्लाम (बहुसंख्यक)

2.

नेपाल

1904 (ब्रिटिश नीतियों के तहत अलग पहचान)

हिंदू और बौद्ध धर्म

3.

भूटान

1906 (संधि और प्रशासनिक अलगाव)

बौद्ध धर्म

4.

तिब्बत

1907 (ब्रिटिश-तिब्बत समझौता)

बौद्ध धर्म

5.

श्रीलंका (सिंहलद्वीप)

1935 (भारत शासन अधिनियम के तहत अलग)

बौद्ध और हिंदू धर्म

6.

मंमार (बर्मा)

1937 (भारत से कानूनी रूप से अलग)

बौद्ध धर्म

7.

पाकिस्तान

1947 (माउंटबेटन योजना / स्वतंत्रता अधिनियम)

इस्लाम (मुख्यतः)

8.

बांग्लादेश

1971 (पाकिस्तान से स्वतंत्रता के बाद)

इस्लाम (मुख्यतः)

 अखंड भारत से देशों के उदय की दास्तां

प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल तक 'अखंड भारत' की सीमाएं उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में हिंद महासागर तक और पश्चिम में ईरान से लेकर पूर्व में म्यांमार (ब्रह्मदेश) तथा दक्षिण-पूर्व के कई क्षेत्रों तक फैली हुई थीं। इस विशाल भू-भाग पर विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के लोग निवास करते थे, जहाँ सनातन (हिंदू) संस्कृति, बौद्ध और जैन दर्शन का व्यापक प्रभाव था।

समय के साथ, विशेषकर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश राज के दौरान, अपनी 'फूट डालो और राज करो' की नीति के तहत अंग्रेजों ने साम्राज्य की सुरक्षा और प्रशासनिक सुविधा के लिए अखंड भारत के इन अंगों को एक-एक करके अलग करना शुरू किया। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में अफगानिस्तान को सामरिक बफर जोन के रूप में अलग किया गया, तो वहीं 20वीं सदी की शुरुआत में नेपाल, भूटान और तिब्बत जैसे हिमालयी क्षेत्रों को स्वतंत्र राजनीतिक इकाइयों का दर्जा दिया गया।

इसके बाद वर्ष 1935 और 1937 के अधिनियमों के माध्यम से क्रमशः श्रीलंका और म्यांमार (बर्मा) को सीधे तौर पर ब्रिटिश भारत के प्रशासन से काट दिया गया। यह प्रक्रिया वर्ष 1947 में अपने चरम पर पहुंची जब धार्मिक और राजनीतिक तनाव के बीच ब्रिटिश भारत का औपचारिक विभाजन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप भारत और पाकिस्तान (जो बाद में 1971 में बांग्लादेश बना) का जन्म हुआ। इन तमाम भौगोलिक बदलावों ने इस उपमहाद्वीप के सामाजिक ताने-बाने और धार्मिक जनसांख्यिकी (Demographics) को हमेशा के लिए बदल दिया।   

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