खगौल की धरती पर खौफ का तांडव: क्या सोई हुई थी व्यवस्था?
दानापुर।
चलती ट्रेन से यात्री को नीचे फेंक देता था रोहित तिवारी!
ज्ञान और संस्कृति की भूमि कहे जाने वाले खगौल और उसके आसपास के क्षेत्रों में हाल ही में जो वीभत्स और दहला देने वाली घटना सामने आई है, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। खुद को पुलिस, आरपीएफ या एसटीएफ का जवान बताकर ट्रेन की दिव्यांग बोगी में यात्रियों को निशाना बनाने वाले रोहित तिवारी जैसे दरिंदे ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं।
फर्जी पहचान का आतंक: यह तथाकथित नर पिशाच खुद को सुरक्षा बल का अधिकारी बताकर यात्रियों पर जुर्माने का दबाव बनाता और विरोध करने पर उन्हें चलती ट्रेन से नीचे फेंक देता था।
बक्सर और अन्य स्थानों पर यात्रियों (जैसे कैलाश कुमार और अन्य) के साथ जो अमानवीय कृत्य किया गया, उसने चंबल के डाकुओं और कुख्यात अपराधियों के इतिहास को भी पीछे छोड़ दिया है।
आखिर भारतीय रेल और सुरक्षा एजेंसियां इतनी लापरवाह कैसे हो सकती हैं कि एक शातिर अपराधी लंबे समय तक ट्रेनों में खुलेआम इस तरह का षड्यंत्र रचता रहा और मासूमों की जान लेता रहा?
इस प्रकार के दानवों के लिए समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। हालांकि आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम द्वारा मोहनिसराय से आरोपी की गिरफ्तारी और स्पीडी ट्रायल चलाकर कड़ी सजा दिलाने की बात कही गई है, परंतु जनता की मांग है कि इस कुकृत्य के लिए उसे ऐसी मिसाल देने वाली सजा मिलनी चाहिए जो आतंकवादियों और रंगा-बिल्ला जैसे दरिंदों को दी जाती है। ऐसे नर पिशाच को अदालत से फांसी (सजा-ए-मौत) से कम कुछ भी नहीं मिलना चाहिए।
"सुरक्षा व्यवस्था की यह चूक असहनीय है। दोषियों को त्वरित न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाए ताकि भविष्य में कोई दूसरा रोहित ऐसी घृणित साजिश रचने की हिम्मत न कर सके।"
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