मेटा का $17.1-अरब का ऐतिहासिक समझौता: कारण, निहितार्थ एवं सीमाएं !
26 अगस्त 2026 को टेक दिग्गज मेटा (Meta) ने अमेरिका के 47 राज्यों के साथ $17.1 बिलियन (लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये) का ऐतिहासिक समझौता किया। यह मुकदमा मेटा द्वारा बच्चों का डेटा बिना सहमति जुटाने और इंस्टाग्राम व फेसबुक को जानबूझकर एडिक्टिव (लत लगाने वाला) बनाकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर आधारित था।
गोपनीयता का उल्लंघन: 29 अमेरिकी राज्यों का आरोप था कि मेटा ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों का निजी डेटा उनके अभिभावकों की सहमति के बिना एकत्र किया, जो COPPA और राज्य गोपनीयता कानूनों का उल्लंघन था।
एडिक्शन और मानसिक नुकसान: कंपनी पर जानबूझकर 'अनंत स्क्रॉलिंग' और 'बॉडी कंपैरिजन' को बढ़ावा देने वाले फीचर्स डिजाइन करने का आरोप था, जिससे किशोरों में अवसाद, चिंता और आत्म-हानि के मामले बढ़े।
मेटा के अपने शोध का सच: मेटा के आंतरिक दस्तावेजों से पता चला कि इंस्टाग्राम की 13.5% ब्रिटिश किशोरियों ने स्वीकार किया कि इस ऐप के उपयोग से उनके मन में आत्मघाती विचार अधिक बार आने लगे।
चेतावनी को नजरअंदाज करना: पूर्व मेटा इंजीनियर (व्हिसलब्लोअर) आर्टुरो बेजर ने गवाही दी कि कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को हिंसक, यौन और हानिकारक सामग्री के बारे में बार-बार सचेत किया गया था, लेकिन राजस्व/एंगेजमेंट बनाए रखने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई।
चिकित्सीय स्थिति का मुद्दा: अमेरिकन सोसाइटी ऑफ एडिक्शन मेडिसिन इसे व्यावहारिक लत ती है। हालांकि, मेटा के वकीलों ने यह तर्क दिया कि 'सोशल मीडिया एडिक्शन' कोई स्थापित मनोरोग/चिकित्सीय स्थिति नहीं है, इसलिए इसे कानूनी तौर पर पूरी तरह लत नहीं माना जा सकता।
मेटा अपने प्लेटफॉर्म्स पर निम्नलिखित सुरक्षात्मक उपाय लागू करने पर सहमत हुआ है:
दैनिक सीमा (2 Hours Limit): किशोरों के खातों पर 2 घंटे की डिफ़ॉल्ट सीमा होगी, जिसे केवल माता-पिता की अनुमति से ही बंद किया जा सकेगा।
शांत मोड पढ़ाई और रात के समय नोटिफिकेशन म्यूट करने वाले फीचर्स।
गैर-एल्गोरिदम फ़ीड: बिना एल्गोरिदम आधारित क्रोनोलॉजिकल फीड का विकल्प।
सख्त फिल्टर व लाइक्स छिपाना: अत्यधिक बॉडी-फ़िल्टर पर प्रतिबंध और किशोर खातों पर लाइक्स छिपाना।
विशेषज्ञों और आलोचकों का मानना है कि ये सुरक्षा उपाय केवल सतही हैं। जब तक मेटा अपने मूल बिजनेस मॉडल — जो उपयोगकर्ताओं को अधिक से अधिक समय तक स्क्रीन से बांधकर रखने और टारगेटेड विज्ञापन दिखाने पर आधारित है — में बदलाव नहीं करता, तब तक बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा का दीर्घकालिक समाधान संभव नहीं है।

Comments
Post a Comment