उपेंद्र कुशवाहा की तरह कितने इस बार स्वाहा हो जाएंगे।

  


बुरे फंसे हैं उपेंद्र कुशवाहा।सीएम की सपना देख रहे थे।एक समय भाजपा व नीतीश दोनों से बगावत कर लिया।राजद के साथ परिणाम सिफर रहा। इस बार एनडीए एक ही सीट उपेंद्र व मांझी को दिया।मांझी को जो होना था वो हो गया।अब कुशवाहा की बारी है।पवन सिंह ललकार रहे हैं।यंग मैन व राजपूत समाज पवन को सर आंखों पर बिठा लिया है।अब काराकाट में कुशवाहा कोइरी लोग दुविधा में है।सम्राट के पगड़ी बचाने में कहीं लँगोटी न खुल जाए। यहां से माले के राजाराम कोइरी समाज से ही है।माले का मतलब राजद,कॉंग्रेस, वीआईपी का साथ। पगड़ी तो अब किसी हालत में बचने वाली नहीं है क्योंकि पवन सिंह भाजपा की टिकट छोड़कर निर्दलीय कुशवाहा को स्वाहा करने ही आये हैं और ये अपनी मर्जी से नहीं आये हैं, बल्कि लाया गया है। पवन की पवन से कहाँ आग लगेगी ये समय बताएगा लेकिन पड़ोस में झुलसन होगी। आरा, बॉक्सर सहित अनेक सीटों पर असर पड़ना लाज़मी है। शिवहर में आनंद मोहन की बोल की हम लव कुश ,बनिया के घर वोट मांगने नहीं जाएंगे । वोटर इतने गिरे हुए नहीं है कि इतनी बेइज्जती के बाद कोई उन्हें वोट देगा ? वैश्य समाज ऐसे भी भाजपा के कोर वोटर्स होने के बाद न के बराबर टिकट मिलने से नाराज हैं लव कुश तो साफ ही है। पटना साहिब से डॉ अंकुश के टिकट मिलने से कोइरी समाज में खुशी है।  पाटलिपुत्र में डॉ रंजन यादव को समय पर समझ आ गई। पूरा गणेश परिक्रमा किये ,जीते भी लेकिन फिर चुहिया की चुहिया वाली हालत हो गई थी। अभी देखते जाइये देश किस तरह करवट ले रहा है और अहंकारी को पता नहीं चल रहा है।

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