श्रीराम के हुंडी में चोर!
चढ़ावे का सच और पाखंड का बाज़ार !
रामलला की आँखों में है, भक्तों की अटूट आस,
मंदिर तो है भव्य, पर चढ़ावे का है काला इतिहास।
भंडार में लगे दान के सिक्के और नोटों के ढेरे,
पर भ्रष्टाचार की घुटन से, साँसें हैं रुकते, ठहरे।
राम से बड़ा नाम का आधार, ये कहते सब ज्ञानी,
पर नाम की आड़ में रचा, इन्होंने ये झूठा संसार।
नाम जपने वाले ही बने, नाम के महाभक्षक,
राम के नाम पर, खुद ही बन बैठे नए रक्षक।
चंदे के नाम पर, आम आदमी के विश्वास की हत्या,
चढ़ावे की लूट ने, श्रद्धा के श्राद्ध में रीत को नहलाया।
पाखंड का पाषाण है, इनकी ये चाकी की चाल,
राम के नाम को व्यापार बना, ये कर रहे हैं बेहाल।
'अयोध्या तो झांकी है'—बस, एक नारा बनकर रह गया,
मंदिर के पीछे का ये गोरखधंधा, सब को डरा गया।
परजीवी भोग-विलास में मस्त हैं, और भूखा है श्रम करने वाला,
जब तक मूर्खता रहेगी, तब तक वर्चस्व ढोंगी माला।
जागो, हे भारतवासियों! इस पाखंड का पर्दा हटाओ,
राम के नाम को कलंकित, अब और न होने पाओ।

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