​भोजपुरी माटी के ‘शेक्सपियर’ भिखारी ठाकुर: लोक-चेतना और मानवीय संवेदना का महा-मंच !

   



खगोल! सर्वप्रथम  कलाकारों व अतिथियों द्वारा भिखारी ठाकुर के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गयी। 

​भोजपुरी संस्कृति के पर्याय, महान लोक कलाकार और कालजयी रचनाकार भिखारी ठाकुर जी का नाम आते ही हमारी आंखों के सामने एक ऐसी जीवंत तस्वीर उभरती है, जो आम आदमी के दर्द, संघर्ष और उमंग को बयां करती है। आज, 10 जुलाई 2026 को उनकी 55वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पटना के खगोल स्थित देवी स्थान में एक विशेष आयोजन "भिखारी ठाकुर: लोक-चेतना और मानवीय संवेदना के स्वर" संपन्न हुआ।

​सांस्कृतिक संस्था 'सूत्रधार' द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम मात्र एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनकी विचारधारा को आज की युवा पीढ़ी से जोड़ने का एक सफल प्रयास रहा।

​लोक-चेतना का संगम

​भिखारी ठाकुर का साहित्य केवल शब्द नहीं, बल्कि उस धड़कन का नाम है जो सदियों से हमारी माटी में रची-बसी है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी कृतियाँ—जैसे 'बिदेसिया' और 'बेटी-बेचवा'—आज के दौर में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी दशकों पहले थीं।

​दिग्गज वक्ताओं के विचार

​कार्यक्रम में साहित्य, रंगमंच और समाजशास्त्र के दिग्गजों ने भिखारी ठाकुर के दृष्टिकोण पर गहरा मंथन किया। इस सत्र की अध्यक्षता 'सूत्रधार' के महासचिव नवाब आलम ने की।

​प्रो. प्रसिद्ध कुमार (शिक्षाविद एवं सामाजिक चिंतक) ने मुख्य परिचर्चा करते हुए कहा कि भिखारी ठाकुर ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज की कुरीतियों और ऊंच-नीच के भेदभाव पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने महिलाओं और गरीबों के प्रति असीम संवेदनाएं व्यक्त कीं।

​नवाब आलम ने उन्हें एक 'अनगढ़ हीरा' बताते हुए कहा कि उनकी कला माटी की सुगंध से सराबोर है।

​नगर परिषद अध्यक्ष सुजीत कुमार ने परिषद की राशि से निर्मित 'रंग कला मंच' के बारे में विस्तार से चर्चा की, जो आने वाले समय में कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करेगा।

​इस बौद्धिक और सांस्कृतिक संगम में राजमणि मिश्रा, विनोद शंकर मिश्रा, रंगकर्मी अरुण सिंह पिंटू, जयप्रकाश मिश्रा, जमुना प्रसाद, मोहन पासवान, अशोक कुणाल और उप-सरपंच विकास कुमार पप्पू सहित कई प्रबुद्ध नागरिकों ने भिखारी ठाकुर की रचनाओं के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

​श्रद्धांजलि का स्वरूप

​कार्यक्रम का समापन नवाब आलम द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कलाकारों अखिलेश सिंह व टीम द्वारा भिखारी ठाकुर के उन अमर गीतों की प्रस्तुति दी गई, जो सीधे श्रोताओं के दिलों में उतर गए। यह आयोजन स्पष्ट करता है कि भिखारी ठाकुर आज भी हमारे बीच हैं—हमारी भाषा में, हमारे गीतों में और हमारे समाज की चेतना में।

​'सूत्रधार' का यह प्रयास वास्तव में सराहनीय है कि उन्होंने अपनी जड़ों से जुड़ने का एक ऐसा माध्यम चुना, जो न केवल मनोरंजन करता है बल्कि हमें मानवीय संवेदनाओं का पाठ भी पढ़ाता है।

​#BhikariThakur #Sootradhar #BhojpuriCulture #PatnaEvents #LokSanskriti #Khagaul #Heritage

Comments

Popular posts from this blog

अलविदा! एक जन-नेता का सफर हुआ पूरा: प्रोफेसर वसीमुल हक़ 'मुन्ना नेता' नहीं रहे !

80 करोड़ की संपत्ति के मालिक पद्मश्री का वृद्धाश्रम में हुआ देहांत, बेटे-बेटी ने मुंह मोड़ा !😢😢

बिहार मतदाता पुनरीक्षण स्थिति रिपोर्ट: एक गहन विश्लेषण !-प्रो प्रसिद्ध कुमार , अर्थशास्त्र विभाग Rlsy college, Anisabad , Patna.