एक संकल्प की दास्तान: जब लद्दाख की आवाज़ दिल्ली की सड़कों पर गूंजी !

 

 आप घर में बैठ कर कथा सुनिये और आपके बच्चे की लडाई लड़ रहे वैज्ञानिक सोनम वांगचुक! 




यह कहानी किसी आम विरोध की नहीं, बल्कि हाड़ कंपाने वाले संकल्प और अपने लोगों के हक के लिए लड़े जा रहे एक मौन युद्ध की है। लद्दाख की बर्फीली वादियों से निकलकर देश की राजधानी के जंतर-मंतर तक पहुंची यह आवाज़ है सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की।

अपने अधिकारों और पर्यावरण की रक्षा के लिए वे एक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, उनका शरीर कमजोर होता गया, लेकिन उनका हौसला उतना ही मजबूत होता गया। देखते ही देखते इस तपस्या को 21 दिन पूरे हो चुके थे।

सफेद चादरों की ओट और वो 30 सेकंड का घटनाक्रम

शनिवार की अलसुबह, जब दिल्ली अभी ठीक से जागी भी नहीं थी, जंतर-मंतर के धरना स्थल पर अचानक हलचल बढ़ गई। पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह का हवाला देकर वांगचुक को वहां से हटाने की तैयारी में थे, क्योंकि लगातार 21 दिनों के उपवास के कारण उनका स्वास्थ्य बेहद नाजुक हो चुका था।

तड़के करीब 6:30 बजे पुलिसकर्मियों ने पूरे मंच को सफेद चादरों से ढंक दिया ताकि बाहर से कुछ दिखाई न दे। उस क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क जैमर भी लगा दिए गए। इसके ठीक बाद, महज 30 सेकंड के भीतर सादी वर्दी में आए पुलिसकर्मियों ने अशक्त हो चुके सोनम वांगचुक को उठाया और सीधे एम्बुलेंस में डालकर सफदरजंग अस्पताल के लिए रवाना हो गए। इस अचानक हुई कार्रवाई की राजनीतिक गलियारों में तीखी आलोचना भी हुई। लेकिन अस्पताल ले जाते समय भी, एम्बुलेंस की खिड़की से कमजोर हाथों को हिलाकर जनता का अभिवादन करते वांगचुक के चेहरे पर हार का कोई भाव नहीं था।

कौन हैं सोनम वांगचुक? 

सोनम वांगचुक केवल एक प्रदर्शनकारी या कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि वे भारत के सबसे नवोन्मेषी (Innovative) इंजीनियरों और शिक्षा सुधारकों में से एक हैं।

वे लद्दाख के पहाड़ी क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए काम करने वाले संगठन SECMOL (Students' Educational and Cultural Movement of Ladakh) के संस्थापक हैं।

मशहूर बॉलीवुड फिल्म '3 इडियट्स' में आमिर खान द्वारा निभाया गया 'फुंसुक वांगडू' का किरदार काफी हद तक सोनम वांगचुक के वास्तविक जीवन और उनके अविष्कारों से ही प्रेरित माना जाता है।

वे लद्दाख की अनूठी संस्कृति, वहां के पर्यावरण और ग्लेशियरों को बचाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।

सोनम वांगचुक की प्रमुख उपलब्धियां

सोनम वांगचुक ने दुनिया को दिखाया है कि कैसे विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल करके स्थानीय समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। उनकी मुख्य उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:

आइस स्तूप (Ice Stupa) का आविष्कार: लद्दाख जैसे ठंडे रेगिस्तान में पानी की किल्लत दूर करने के लिए उन्होंने कृत्रिम ग्लेशियर (Artificial Glaciers) बनाने की तकनीक विकसित की, जिसे 'आइस स्तूप' कहा जाता है। यह सर्दियों के पानी को बर्फ के शंकु के रूप में जमा करता है, जो गर्मियों में पिघलकर खेती के काम आता है।

रोलेक्स अवार्ड फॉर एंटरप्राइज (Rolex Award for Enterprise): उनके इसी 'आइस स्तूप' के क्रांतिकारी आविष्कार के लिए उन्हें 2016 में वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित रोलेक्स पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

रमन मैगसेसे पुरस्कार (Ramon Magsaysay Award): शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व सुधारों, सामुदायिक सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के लिए उन्हें 2018 में 'एशिया का नोबेल' कहे जाने वाले रमन मैगसेसे पुरस्कार से नवाजा गया।

मिट्टी और सौर ऊर्जा से चलने वाले घर: उन्होंने लद्दाख की कड़कड़ाती ठंड (माइनस डिग्री तापमान) में भी बिना किसी हीटर या कोयले के, सिर्फ धूप और स्थानीय मिट्टी की मदद से गर्म रहने वाले इको-फ्रेंडली घरों का निर्माण किया।

अस्पताल के बिस्तर पर होने के बावजूद, सोनम वांगचुक का यह 21 दिनों का संघर्ष इस बात का प्रतीक है कि जब इरादे नेक और हौसले फौलादी हों, तो एक अकेला इंसान भी पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच सकता है।

Comments

Popular posts from this blog

अलविदा! एक जन-नेता का सफर हुआ पूरा: प्रोफेसर वसीमुल हक़ 'मुन्ना नेता' नहीं रहे !

80 करोड़ की संपत्ति के मालिक पद्मश्री का वृद्धाश्रम में हुआ देहांत, बेटे-बेटी ने मुंह मोड़ा !😢😢

बिहार मतदाता पुनरीक्षण स्थिति रिपोर्ट: एक गहन विश्लेषण !-प्रो प्रसिद्ध कुमार , अर्थशास्त्र विभाग Rlsy college, Anisabad , Patna.