कैंसर: राष्ट्रीय स्तर पर 'अधिसूचनीय रोग' बनाने की आवश्यकता!

   


​वर्तमान में भारत में कैंसर एक 'अधिसूचनीय रोग' नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय का पारंपरिक दृष्टिकोण यह है कि इस श्रेणी में केवल संक्रामक रोगों को ही शामिल किया जाना चाहिए। अब इस नीति को बदलने और कैंसर को राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचनीय बनाने का समय आ गया है।

केंद्र सरकार वर्तमान में जनसंख्या-आधारित और अस्पताल-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियों पर निर्भर है। ये रजिस्ट्रियां देश की केवल 10% से 16% आबादी को कवर करती हैं और इनमें शहरी तथा सरकारी स्वास्थ्य ढांचे की ओर झुकाव अधिक है।

 भारत में कैंसर का एक बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र द्वारा संभाला जाता है, जिसका डेटा समान रूप से दर्ज नहीं हो पाता है।

​राज्यों की पहल: कई राज्य पहले ही कैंसर को अधिसूचनीय बना चुके हैं। तेलंगाना इस सूची में शामिल होने वाला नवीनतम राज्य है, जिससे अब ऐसे राज्यों की कुल संख्या 17 हो गई है।

ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी (WHO) के अनुमान के अनुसार, 2022 (1.41 मिलियन) से 2045 (2.46 मिलियन) के बीच कैंसर के मामलों में 74% से अधिक की वृद्धि होने की आशंका है।

बढ़ती उम्र और जीवनशैली में बदलाव को देखते हुए, सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सटीक डेटा होना अनिवार्य है। केवल राज्यों के प्रयासों से एक राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार नहीं की जा सकती।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद  ने वर्षों पहले कैंसर को अधिसूचनीय रोग बनाने की सिफारिश की थी।

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