राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: CEO पद का सृजन!

 



 

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपने गठन (2020) के बाद से अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक फेरबदल से गुजर रहा है। ट्रस्ट ने अपने दो सबसे प्रभावशाली पदाधिकारियों—महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा—का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और पहली बार एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

 हाल ही में दान और वित्तीय लेनदेन को लेकर उपजे विवादों (जैसे चोरी और जमीन खरीद के आरोप) के बाद पारदर्शिता लाने और 'पेशेवर वित्तीय प्रबंधन' स्थापित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। आरएसएस  ने भी प्रशासनिक प्रणालियों को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया था।

नई प्रशासनिक व्यवस्था: पारंपरिक व्यवस्था में अब तक ट्रस्टी और पदाधिकारी ही सीधे तौर पर दैनिक कार्यों का संचालन करते थे। अब CEO की नियुक्ति से दैनिक प्रशासन पेशेवर तरीके से चलेगा, जिससे ट्रस्टी मुख्य रूप से नीतिगत निर्णयों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। यह मॉडल तिरुपति और माता वैष्णो देवी जैसे अन्य बड़े मंदिरों के समान है।

पारदर्शिता का अभाव (अन्य मंदिरों से तुलना):

तिरुपति, जगन्नाथ और वैष्णो देवी जैसे प्रमुख मंदिर राज्य कानूनों और सरकारी ऑडिट के अंतर्गत आते हैं तथा RTI के प्रति पूरी तरह जवाबदेह हैं।

इसके विपरीत, राम मंदिर ट्रस्ट एक स्वतंत्र सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट है, जो RTI के दायरे से बाहर है और इसका ऑडिट निजी तौर पर होता है। इसकी आंतरिक नियम पुस्तिका अभी भी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं की गई है।

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