सिर्फ असेंबल न करें, नवाचार (Innovation) करें!
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया है, जिसका श्रेय मुख्य रूप से PLI (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) जैसी सरकारी नीतियों को जाता है।
वर्तमान में, भारतीय कंपनियाँ मुख्य रूप से केवल 'असेंबली' (जुड़ाव) तक सीमित हैं। उच्च-मूल्य वाली गतिविधियाँ जैसे डिजाइन, तकनीक और बौद्धिक संपदा (IP) अभी भी अमेरिका, यूरोप और चीन की कंपनियों के पास हैं।
अतीत में भारतीय ब्रांड (जैसे लावा, माइक्रोमैक्स) ने बाजार में अच्छी हिस्सेदारी बनाई थी, लेकिन वे R&D (अनुसंधान और विकास) में निवेश न करने के कारण लंबे समय तक टिक नहीं पाए।
वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए, भारतीय कंपनियों को केवल दूसरों की तकनीक का उपयोग करने के बजाय अपनी खुद की तकनीक विकसित करनी होगी और पेटेंट पोर्टफोलियो का विस्तार करना होगा।
भारत को एक 'असेंबली हब' से बदलकर एक 'नवाचार-संचालित तकनीकी पावरहाउस' बनने की आवश्यकता है। इसके लिए स्थानीय नवाचारों को बनाने और उनका मुद्रीकरण करना अनिवार्य है, जो 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्यों के अनुरूप है।

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