'She Walks in Beauty' . - Lord Byron. Poem.

 




ये अंग्रेजी की कविता आज भी मुझे बहुत रोचक लगती है। 

इस प्रसिद्ध कविता के कवि लॉर्ड बायरन हैं, जिनका पूरा नाम जॉर्ज गॉर्डन बायरन (George Gordon Byron) था। वे अंग्रेजी साहित्य के प्रमुख 'रोमांटिक युग' (Romantic Era) के कवियों में से एक हैं।

 यह कविता 1814 में लिखी गई थी और बाद में 1815 में उनके संग्रह 'हेब्रू मेलोडीज़' (Hebrew Melodies) में प्रकाशित हुई।

यह कविता एक वास्तविक घटना से प्रेरित है। जून 1814 में लॉर्ड बायरन लंदन में एक पार्टी (बॉल डांस) में शामिल हुए थे। वहाँ उनकी मुलाकात अपनी चचेरी बहन (बॉस/रिश्तेदार की पत्नी) श्रीमती जॉन विल्मॉट से हुई।

उस समय श्रीमती विल्मॉट एक गहरे रंग की (काली) पोशाक पहने हुई थीं, जिस पर चमकीले सितारे/स्पैंगल्स लगे हुए थे। उनकी यह सुंदरता शांत, सौम्य और अद्वितीय थी। उनके इस रूप और मासूमियत से प्रभावित होकर बायरन ने अगले ही दिन यह कविता लिख दी।

इस कविता का मुख्य भाव "आंतरिक और बाह्य सुंदरता का सुंदर सामंजस्य" है।

कवि महिला की तुलना साफ़, तारों भरी रात से करता है। जिस तरह रात में अंधेरे और रोशनी का एक संतुलित मिश्रण होता है, उसी तरह उस महिला के चेहरे और आंखों में "अंधेरे और प्रकाश" का अद्भुत संतुलन है।

सौम्यता और सादगी: उसकी सुंदरता किसी चमकदार या तेज धूप जैसी तीखी नहीं है, बल्कि रात की तरह शांत, गंभीर और कोमल है। बायरन केवल शारीरिक सुंदरता की प्रशंसा नहीं करते। कविता के अंतिम छंदों में वे बताते हैं कि महिला के चेहरे पर जो शांति और मंद मुस्कान है, वह उसके पवित्र मन, निर्मल विचारों और एक निर्दोष (मासूम) हृदय को दर्शाती है। 'She Walks in Beauty' केवल किसी के रूप-रंग की तारीफ नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि जब इंसान का मन और विचार साफ़ होते हैं, तो उसकी बाह्य सुंदरता और भी अधिक निखर जाती है।

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