खगौल में लगातार अनसुलझी गुमशुदगी से दहशत: छात्रा सपना कुमारी का सुराग नहीं, 13 महीने पुराना रामलड्डू के गुमशुदगी जैसा पैटर्न दोहराने की आशंका! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

   


(तस्वीर में देर रात तक दानापुर ए एस पी के साथ मैं घटना का अवलोकन करते हुए।) 

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दानापुर/खगौल (पटना)।

केंद्रीय विद्यालय (KV) खगौल की 10वीं की छात्रा सपना कुमारी के रहस्यमय परिस्थितियों में गायब होने के बाद पूरे इलाके में डर और आक्रोश का माहौल है। छुट्टी के बाद घर लौट रही 15 वर्षीया छात्रा के कपड़े, स्कूल बैग और आई-कार्ड जमालुद्दीन चक के पास रेलवे ट्रैक के किनारे घनी झाड़ियों में लावारिस हालत में मिले। इस खौफनाक मंजर ने न सिर्फ परिजनों को हिलाकर रख दिया है, बल्कि 13 महीने पहले इसी खगौल इलाके से गायब हुए समाजसेवी रामलड्डू कुमार के अनसुलझे मामले की यादें भी ताजा कर दी हैं।

सपना कुमारी मामला: सुनसान रेलवे ट्रैक से कपड़े व बस्ता बरामद

बाबूचक गांव की रहने वाली और दानापुर रेलवे में कार्यरत संजय कुमार की पुत्री सपना कुमारी दोपहर 2 बजे स्कूल से निकली थी। अपनी सहेली से जमालुद्दीन चक के पास अलग होने के बाद वह अकेले लोको कॉलोनी स्थित अपने आवास की ओर बढ़ी। रेलवे ट्रैक के दोनों ओर घने जंगल और अत्यधिक वीरान माहौल का फायदा उठाकर अज्ञात अपराधियों ने घटना को अंजाम दिया।

घटना की सूचना मिलते ही एएसपी दानापुर, खगौल थाना प्रभारी, आरपीएफ और डॉग स्क्वॉड की टीमों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। पड़ोसी और प्रत्यक्षदर्शी प्रो. प्रसिद्ध कुमार ने पुलिस प्रशासन के साथ घटनास्थल का मुआयना करने के बाद कहा, "जिस तरह से छात्रा के कपड़े और बैग बिखरे मिले हैं, उससे किसी बहुत बड़ी अप्रिय वारदात से इनकार नहीं किया जा सकता। पूरा इलाका सहमा हुआ है।"

13 महीने का अंतर, दो रहस्यमय गुमशुदगी और एक ही खौफ

सपना कुमारी और 6 जुलाई 2025 को गायब हुए समाजसेवी रामलड्डू कुमार (50 वर्ष) के मामलों में चौंकाने वाली समानताएं सामने आ रही हैं:

एक ही  पंचायत व प्रखंड का जुड़ाव: दोनों ही पीड़ित फुलवारी शरीफ प्रखंड के मैनपुर अंदा पंचायत के मूल निवासी हैं। मंझौली गांव के रामलड्डू कुमार (खगौल से 7 किमी) बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए शहर में बसे थे, जबकि बाबूचक (खगौल से 3 किमी) की सपना अच्छी शिक्षा पाने शहर आई थी।

लावारिस सामान और पुलिस की विफलता: रामलड्डू कुमार के गायब होने के दो दिन बाद उनकी मोटरसाइकिल खगौल आवास के पास लावारिस मिली थी। पुलिस ने तब भी "हर एंगल से तकनीकी जांच" का दावा किया था, लेकिन नतीजा शून्य रहा। सपना के मामले में भी घटना के तुरंत बाद बैग, कपड़े और आई-कार्ड झाड़ियों में मिले हैं।

परिजनों का अविश्वास: रामलड्डू मामले का कोई नतीजा न निकलने के कारण सपना के परिजन और स्थानीय लोग पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर बेहद आशंकित हैं।

अपराधियों का सुरक्षित अड्डा बनती खगौल रेलवे कॉलोनी

खगौल की रेलवे कॉलोनी और इसके आसपास के वीरान इलाके लंबे समय से असामाजिक तत्वों और अपराधियों की शरणस्थली बने हुए हैं।

पूर्व की खौफनाक वारदात: वर्ष 2022 में नेउरा कॉलोनी (खगौल) में अपराधियों ने एक युवक की निर्मम हत्या कर उसके शव को रेलवे क्वार्टर के भीतर ही दफना दिया था। 19 दिनों बाद जब अपराधी पकड़े गए, तब जाकर शव बरामद हो सका था।

सुनसान ट्रैक, घने जंगल और बंद पड़े रेलवे क्वार्टरों में पुलिस गश्त न होने के कारण अपराधी बेखौफ होकर ऐसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

त्वरित कार्रवाई और कड़े फैसलों की जरूरत

रामलड्डू कुमार के मामले में मिली नाकामी से सबक लेते हुए बिहार पुलिस को सपना कुमारी के मामले में केवल "जांच का आश्वासन" देने के बजाय धरातल पर कड़े कदम उठाने होंगे:

समयबद्ध जांच (Time-bound Investigation): डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीमों की रिपोर्ट के आधार पर संदिग्ध ठिकानों पर तुरंत छापेमारी की जाए।

रेलवे कॉलोनी में कॉम्बिंग ऑपरेशन: वीरान पड़े रेलवे क्वार्टरों और झाड़ियों की सघन तलाशी ली जाए ताकि अपराधियों के ठिकाने नष्ट किए जा सकें।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: स्कूल छूटने के समय सुनसान रास्तों और रेलवे ट्रैक के आसपास नियमित पुलिस गश्त और सीसीटीवी सर्विलांस की व्यवस्था की जाए।

अगर पुलिस ने इस बार भी ढिलाई बरती, तो खगौल का यह खौफनाक ट्रेंड किसी और मासूम की जान ले सकता है। परिजनों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सपना की सुरक्षित वापसी और अपराधियों की तुरंत गिरफ्तारी चाहिए।












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