असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती नियमावली में बड़ा बदलाव: उम्र सीमा 55 वर्ष करने पर सहमति, RLSY कॉलेज में खुशी का माहौल।
उच्च शिक्षा और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया को लेकर बिहार के शोध छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे अभ्यर्थियों और ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च एसोसिएशन की राज्यपाल के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद आंदोलन खत्म करने का आश्वासन दिया गया है।
इस ऐतिहासिक फैसले और सफलता की खुशी में RLSY कॉलेज के प्रो. डॉ. पारस नाथ यादव ने, जिन्होंने इस संघर्ष में शुरू से बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था, कॉलेज परिवार और अपने सहयोगियों को लड्डू खिलाकर खुशियां जाहिर कीं।
वार्ता में बने प्रमुख सहमति बिंदु
राज्यपाल के साथ हुई वार्ता में कई महत्वपूर्ण निर्णय और बदलावों पर सहमति बनी है:
उम्र सीमा में छूट: असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति में अधिकतम उम्र सीमा को 43 वर्ष से बढ़ाकर 55 वर्ष करने का फैसला किया गया है।
ऑब्जेक्टिव परीक्षा का प्रस्ताव: लिखित परीक्षा कराने और उसमें वस्तुनिष्ठ (Objective) प्रश्न पूछने के साथ-साथ टीचिंग डेमो (Teaching Demo) को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
API स्कोर और अनुभव: API स्कोर में अनुभव और शोध प्रकाशन (Research Publication) को स्पष्ट परिभाषा के साथ शामिल किया जाएगा, जिससे योग्य अभ्यर्थियों को उचित लाभ मिल सके।
समिति का गठन: अन्य मांगों और नियमावली के संशोधनों पर विचार करने के लिए 15 दिनों में एक समिति का गठन किया जाएगा।
अनशन खत्म करने का आश्वासन: राज्यपाल से मिले ठोस आश्वासन के बाद पिछले 21 दिनों से अनशन कर रहे शोध छात्रों ने अपना आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया।
RLSY कॉलेज परिवार में जश्न का माहौल
इस निर्णय के आते ही RLSY कॉलेज में उत्सव का माहौल देखने को मिला। डॉ. पारस नाथ यादव ने कॉलेज के सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों का मुंह मीठा कराया।
"यह जीत उन सभी संघर्षशील शोध छात्रों और अभ्यर्थियों की मेहनत का परिणाम है जो लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे थे। नियमावली में इस बदलाव से योग्य और अनुभवी अभ्यर्थियों को उचित अवसर मिलेगा।" — डॉ. पारस नाथ यादव
इस फैसले से राज्यभर के उच्च शिक्षा अभ्यर्थियों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है।

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