लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में बड़ा हादसा: तीसरी सोमवारी पर भगदड़ से 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत, 19 घायल।
स्थान: लखीसराय, बिहार सावन की तीसरी सोमवारी
बिहार के लखीसराय जिले में स्थित ऐतिहासिक और प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर (इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर) में सावन की तीसरी सोमवारी के अवसर पर एक अत्यंत दुखद हादसा घटित हो गया। भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए जुटी भारी भीड़ के दौरान अचानक भगदड़ मच गई। इस हृदयविदारक घटना में 7 महिला श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 19 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
सावन महीने के तीसरे सोमवार को सुबह से ही अशोक धाम मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु कतारबद्ध थे।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़: अलसुबह से ही मंदिर परिसर और प्रवेश द्वारों पर जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें लगी हुई थीं।
अचानक मची अफ़रातफ़री: जल चढ़ाने की होड़ और भीड़ के अत्यधिक दबाव के कारण अचानक श्रद्धालुओं के बीच धक्का-मुक्की और अफ़रातफ़री का माहौल बन गया।
भगदड़ का रूप: कतार में खड़ी महिलाएं और बुजुर्ग संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर गए, जिसके बाद पीछे से आ रही भीड़ के दबाव से भगदड़ मच गई।
हताहत: इस भगदड़ की चपेट में आने से 7 महिला श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 19 लोग घायल हो गए।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, मंदिर प्रबंधन समिति और पुलिस बल ने मोर्चा संभाला:
अस्पताल में भर्ती: सभी घायलों को तुरंत एम्बुलेंस और स्थानीय वाहनों की मदद से नजदीकी सदर अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया।
इलाज की व्यवस्था: जिला प्रशासन ने डॉक्टरों की टीम को अलर्ट पर रखकर घायलों के त्वरित और समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं।
इस दर्दनाक हादसे पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। इसके साथ ही राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन को पीड़ितों की हर संभव सहायता करने के निर्देश दिए गए हैं।
धार्मिक आयोजनों और सावन जैसे पवित्र महीनों में मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। लखीसराय के अशोक धाम में हुई यह घटना भीड़ प्रबंधन (Crowd Management), सुरक्षा मानकों और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए मंदिर प्रशासनों और स्थानीय पुलिस को मजबूत बैरिकेडिंग, एकतरफा आवाजाही (One-way entry/exit) तथा सख्त नियंत्रण उपाय सुनिश्चित करने होंगे।

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