मुझको अपने बैंक का किताब दीजिए (हिसाब दीजिए) -लेखिका/गीतकार: साक्षी दुबे ।

 






मुझको अपने बैंक का किताब दीजिए,

देश की तबाही का हिसाब दीजिए।

युवा सारे देश के सड़क पर आ गये,

नीट पेपर लीक पर तुम चुप्पी खा गये।

भगवान को भी लूट कर ठेंगा दिखा गये,

जनता करे मांग तो जवाब दीजिए,

मुझको अपने बैंक  का किताब दीजिए।

आजाद हर आवाज को ये शेर कह गये,

इंसाफ मांगे इनसे में देशद्रोह कह गये।

जलते मणिपुर का भी इलाज कीजिए,

मुझको अपने बैंक का किताब दीजिए...

मंदिरों के नाम पर तुम वोट ले गये,

उसिका चन्दा, रोजगार और रोड ले गये।

तुम्हारे दोस्त देश बेच के करोड लेगये,

धर्म के ठेकेदार इन्साफ कीजिए,

देश कि तबाही का हिसाब दीजिए।

संदर्भ (शॉर्ट आलेख)

युवा आक्रोश और 'जेन जी' का विरोध-गीत

साक्षी दुबे द्वारा लिखित और गाया गया यह गीत 'जेन जी' (Gen Z) यानी आज की युवा पीढ़ी के सामाजिक-राजनीतिक आक्रोश की एक सशक्त आवाज़ बनकर उभरा है। सोशल मीडिया (जैसे रील्स, यूट्यूब और एक्स) पर यह गीत काफी वायरल हुआ है।

इस आलेख और गीत का मुख्य संदर्भ देश के ज्वलंत मुद्दों से जुड़ा है:

पेपर लीक और बेरोजगारी: नीट (NEET) जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक होने के कारण लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट मंडराया, जिसके विरोध में युवा सड़कों पर उतरे।

मणिपुर हिंसा और चुप्पी: मणिपुर में लंबे समय से जारी सांप्रदायिक व सामाजिक अशांति पर सरकार की कथित बेरुखी और चुप्पी को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

राजनीति और आर्थिक असमानता: धर्म, मंदिर और चंदे के नाम पर राजनीति करने तथा जनता के मूलभूत अधिकारों (रोजगार, बेहतर सड़कें और स्वास्थ्य सुविधाएं) की अनदेखी का आरोप लगाया गया है।

यह गीत सत्ता और प्रशासन से जवाबदेही (Accountability) और पारदर्शिता मांगने का एक निर्भीक माध्यम बना है, जिसे युवाओं ने विरोध-प्रदर्शनों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी बात रखने के लिए व्यापक रूप से अपनाया है।

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