भारत का राजकोषीय परिदृश्य: भू-राजनीतिक चुनौतियाँ, राजस्व दबाव और आर्थिक संभावनाएँ।

 




वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार का राजकोषीय परिदृश्य वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और हालिया कर सुधारों के दोहरे प्रभाव से गुजर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की अनिश्चित कीमतों तथा घरेलू स्तर पर कर दरों के युक्तीकरण के कारण कर राजस्व संग्रह पर दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद, गैर-कर राजस्व में मजबूती और समय पर किए गए नीतिगत उपायों के बल पर देश का समग्र राजकोषीय संतुलन मोटे तौर पर लक्ष्य के करीब बने रहने की उम्मीद है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में नियंत्रक महालेखाकार (CGA) के आंकड़ों के अनुसार, केंद्र का सकल कर राजस्व केवल 3.7% की दर से बढ़ा। इसका मुख्य कारण व्यक्तिगत आयकर और माल एवं सेवा कर  में किए गए व्यापक कर कटौती व दर-युक्तीकरण थे:

आयकर एवं जीएसटी: वर्ष 2025-26 में कर कटौती के परिणामस्वरूप PIT वृद्धि दर लगभग शून्य (0.037%) रही थी। 2026-27 की पहली तिमाही में PIT में 6.8% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि GST संग्रह में (-)11% का संकुचन देखा गया।

उत्पाद शुल्क में कटौती: पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल से उपभोक्ताओं को राहत देने हेतु सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क  घटाया, जिससे Q1 में उत्पाद शुल्क राजस्व में 22.4% की गिरावट आई।

राजस्व क्षतिपूर्ति के उपाय: इस घाटे की भरपाई के लिए सरकार ने कई उपचारात्मक कदम उठाए हैं:

स्वास्थ्य सुरक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लागू किया गया।

अगस्त 2026 से डीजल, पेट्रोल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल  के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया गया।

सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में वृद्धि की गई।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सांकेतिक जीडीपी वृद्धि दर 12.5% से 13% के दायरे में रहने का अनुमान है, जो बजटीय लक्ष्य (10.04%) से बेहतर है:

वास्तविक जीडीपी : लगभग 7% रहने की संभावना है।

मुद्रास्फीति दर: पहली तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) 3.9% और थोक मूल्य सूचकांक 9.3% पर दर्ज किया गया, जिसके आधार पर अंतर्निहित मूल्य अपस्फीतिकारक  5% से 5.5% के बीच है।

हालाँकि 2022-23 की नई आधार श्रृंखला के अनुसार  का आकार ₹391 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जो बजटीय ₹393 लाख करोड़ से मामूली रूप से कम है।

कर विचलन : 16वें वित्त आयोग द्वारा राज्यों के लिए विभाज्य पूल का हिस्सा 41% बनाए रखने के बावजूद, Q1 में राज्यों को हस्तांतरित करों में (-)19.5% की गिरावट दर्ज की गई। आगामी तिमाहियों में इसमें सुधार की उम्मीद है।

आरबीआई का लाभांश: मई 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक  द्वारा हस्तांतरित लाभांश ने राजकोष को बड़ा संबल प्रदान किया। पहली तिमाही में ही पूरे वर्ष के लिए बजटीय लाभांश/लाभ के 77% हिस्से की प्राप्ति हो चुकी है।

4. सब्सिडी का बोझ और पूंजीगत व्यय 

गैर-कर राजस्व का योगदान: Q1 में कुल शुद्ध राजस्व प्राप्तियों का 37% हिस्सा गैर-कर स्रोतों (मुख्यतः RBI लाभांश) से प्राप्त हुआ।

सब्सिडी का बढ़ता दबाव: कच्चे तेल के ऊंचे दामों के कारण Q1 में प्रमुख सब्सिडी में 37.4% की वृद्धि हुई। अनुमान है कि पूरे वर्ष के लिए वास्तविक सब्सिडी का व्यय बजटीय आवंटन से लगभग ₹50,000 करोड़ अधिक निकल सकता है।

पूंजीगत व्यय : सरकार ने पहली तिमाही में ही  को प्राथमिकता देते हुए इसमें 23.7% की उल्लेखनीय वृद्धि की है।

वर्तमान आंकड़ों के आधार पर केंद्र सरकार के राजकोषीय परिणाम बजट के लक्ष्यों से बहुत अधिक भटकते हुए प्रतीत नहीं होते। गैर-कर राजस्व की मजबूती और पूंजीगत व्यय पर ध्यान केंद्र को स्थिरता प्रदान कर रहा है। हालांकि, यदि पश्चिम एशिया में युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव और अधिक गहराता है, तो वैश्विक तेल कीमतों में संभावित उछाल और अतिरिक्त सब्सिडी का बोझ भारतीय अर्थव्यवस्था तथा केंद्रीय वित्त पर बड़ा आघात पहुँचा सकता है।


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