विलंब का जोखिम ।

   


यदि भारत एक साथ दो मोर्चों पर संकट का सामना करता है (उदा. लद्दाख और सियाचिन में एक साथ तनाव), तो यह निर्णय कौन और कितनी जल्दी लेगा कि राफेल लड़ाकू विमानों या S-400 वायु रक्षा प्रणालियों की सीमित संपत्तियों को कहाँ तैनात किया जाए?

थिएटरइजेशन का उद्देश्य भारतीय वायु सेना की स्वायत्तता या लचीलेपन को कम करना नहीं है, बल्कि कमांड संरचना को मजबूत बनाना है ताकि युद्ध की स्थिति में संसाधनों का सही और त्वरित उपयोग हो सके। यदि यह बहस अनसुलझी रहती है, तो विफलता का दायरा केवल वायु सेना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी सैन्य संरचना की तैयारी पर सवाल खड़े करेगा।

यह निर्णय केवल वायु सेना का नहीं, बल्कि भारत के राजनीतिक नेतृत्व का है, जिसकी जवाबदेही राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति सबसे अधिक है।

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