युवा बेरोजगारी का घरेलू और आर्थिक बोझ: आँकड़ों से परे एक वास्तविक संकट।

 




भारत में युवा बेरोजगारी को प्रायः केवल व्यक्तिगत आंकड़ों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं की संख्या के दायरे में देखा जाता है। हालिया 'आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण' (PLFS 2025) के अनुसार, 18-29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर 14.8% है, जो उच्च शिक्षित (डिप्लोमा, स्नातक या स्नातकोत्तर) युवाओं में बढ़कर 29.4% तक पहुँच जाती है। हालाँकि, यह आँकड़ा पूरे परिदृश्य को उजागर नहीं करता। यदि 'NEET' (रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण में शामिल न होने वाले) श्रेणी को देखें, तो उच्च शिक्षित युवाओं में यह आंकड़ा 40.1% है, जिसमें 74.7% शिक्षित युवतियाँ श्रम बल से ही बाहर हैं।

बेरोजगारी केवल व्यक्तिगत विफलता या प्रतीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार का एक साझा आर्थिक संकट है।

खर्च और बचत पर असर: जिन घरों में शिक्षित बेरोजगार युवा हैं, वे सामान्य परिवारों की तुलना में प्रति माह औसतन ₹1,087 कम उपभोग खर्च करते हैं।

कम आय वाले स्रोत: ऐसे परिवारों में औसतन केवल 1.5 कमाने वाले सदस्य होते हैं। लगभग 39.5% परिवार केवल एक व्यक्ति की कमाई पर निर्भर हैं, जबकि 62.5% परिवारों में किसी भी सदस्य के पास नियमित वेतन वाली नौकरी नहीं है।

लंबे इंतजार की कीमत: लगभग 58% उच्च शिक्षित युवा एक वर्ष से अधिक समय से काम की तलाश कर रहे हैं, जबकि 28.9% युवा दो वर्ष से अधिक समय से बेरोजगार हैं। यह लंबा इंतजार पारिवारिक बचत को समाप्त कर देता है और दैनिक खपत में कटौती के लिए मजबूर करता है।

वर्तमान रोजगार नीतियां बेरोजगारी को केवल एक व्यक्तिगत समस्या मानती हैं और इसका समाधान अप्रेंटिसशिप या कौशल विकास में खोजती हैं। जबकि सच्चाई यह है कि लंबे चयन चक्र, भर्ती में देरी और परीक्षा पेपर लीक जैसी स्थितियाँ परिवारों पर अत्यधिक वित्तीय बोझ डालती हैं।

बेरोजगारी का समाधान केवल नौकरियों के सृजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को कम करने और उन परिवारों के आर्थिक हालात को ध्यान में रखने की आवश्यकता है जो इन युवाओं की लंबी तलाश को वित्तपोषित कर रहे हैं।

Comments

Popular posts from this blog

अलविदा! एक जन-नेता का सफर हुआ पूरा: प्रोफेसर वसीमुल हक़ 'मुन्ना नेता' नहीं रहे !

केवी स्कूल की छात्रा रास्ते से रहस्यमय परिस्थितियों में गायब, रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में मिले कपड़े और बस्ता! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

नेउरा-दनियावाँ रेल खंड: क्या बाबूचक-मोहम्मदपुर में बनेगा 'शहीद जयगोविंद सिंह यादव रेलवे स्टेशन'?