घटती प्रजनन दर और भविष्य का आर्थिक संकट !
प्रजनन दर का वर्तमान स्तर: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर 1.9 हो गई है, जो जनसंख्या संतुलन के लिए आवश्यक 2.1 के आंकड़े से काफी कम है।
ऐतिहासिक गिरावट का क्रम:
प्रजनन दर में गिरावट की शुरुआत 1970 के दशक के मध्य से हुई थी।
1990 से 2000 के बीच सबसे तेज गिरावट देखी गई। वर्ष 1991 में जो प्रजनन दर 3.6 थी, वह 2001 तक घटकर 3.1 रह गई।
2001 से अब तक इसमें लगातार तेज गिरावट आई है और यह इतिहास के अपने सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है।
आर्थिक प्रभाव और चुनौतियाँ:
कार्यबल में भारी कमी: प्रजनन दर में गिरावट से भविष्य में युवा आबादी का अनुपात कम होगा, जिससे देश के मानव संसाधन और श्रम शक्ति में बड़ी गिरावट का खतरा है।
क्षेत्रीय असमानता -देश के विभिन्न राज्यों में प्रजनन दर के असमान स्तरों के कारण भविष्य में आर्थिक और जनसांख्यिकीय असंतुलन पैदा हो सकता है।
भविष्य के युवाओं पर आर्थिक बोझ: यदि समय रहते इस डेमोग्राफिक बदलाव और चुनौतियों पर नीतिगत कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में वृद्ध होती आबादी की देखभाल और सामाजिक सुरक्षा का भार देश के सीमित युवा कंधों पर पड़ेगा।

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