जो संविधान को जलाते हैं और मनुस्मृति लाना चाहते हैं वो असम्भव है।बाबा साहेब अंबेडकर ने पुख्ता व्यवस्था कर दिये हैं। अंधविश्वास, पोंगापंथियों, धर्म के ठेकेदारों, कथावाचकों से किसी को कोई शक्ति मिलने वाली नही है। एक मंदिर के पुजारी नही बन सकते चाहे वो नारी हो, किन्नर हो, पिछड़ा ही क्यों न हो, लेकिन संविधान मुखिया से लेकर सीएम, पीएम, राष्ट्रपति तक हमारे देश में महिला, कमजोर वर्ग के लोग बने हैं, फिर इसकी जानकारी नहीं रखना और इसे छोड़कर ढोंगियों के पीछे दौड़ना कहाँ की बुद्धिमानी है। हमारा संविधान सभी देशों के संविधान से बड़ा है। अमेरिका का संविधान तीन पन्नों में सिमट जाता है। इंग्लैंड वालों से संविधान मांगोगे तो वो पूछेंगे कि यह क्या होता है? पिछले सात दशक में देश के सामने बहुत सी कठिन परिस्थितियां आईं, लेकिन हमारा संविधान टस से मस नहीं हुआ। यही इसकी कामयाबी है। मुश्किल से मुश्किल दौर में अडिग खड़े रहना ही इसकी कामयाबी है। तो मुङो नहीं लगता कि अब कोई शक रह जाता है कि संविधान सबसे बड़ा है और सभी को इसका पालन करना पड़ेगा। जो ऐसा नहीं करेगा, उसके लिए भी संविधान में व्यवस्...