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चुनाव में करीब से गरीबों के दर्द महसूस किया राजद।प्रसिद्ध यादव

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    तारापुर में रीतलाल आत्मीयता के साथ मिल रहे गरीबों से। उदय नारायण चौधरी ने संभाल ली है कमान। कुशेश्वर में भोला यादव।सिद्धनाथ यादव , शेखर यादव भी। राजद के राष्ट्रीय नेता व पूर्व मंत्री श्याम रजक, शिवचंद्र राम सहित तमाम छोटे बड़े नेता अपनी पसीना बहा रहे हैं। ये दो सीट पर राजद को जीतने की प्रबल संभावना है।अगर ऐसा हुआ तब तेजस्वी यादव जल्द ही विरोधी दल के नेता से मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

अनुच्छेद 368 संवैधानिक उपचारों का उपचार है। प्रसिद्ध यादव।

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        अनुच्छेद 368 (1) संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्रदान करता है । अनुच्छेद यह कहता है कि इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी संसद अपनी संविधायी शक्ति का प्रयोग करते हुए इस संविधान के किसी उपबन्ध का परिवर्द्धन परिवर्तन या निरसन के रूप में इस अनुच्छेद में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुसार संशोधन कर सकेगी । खण्ड (2) यह कहता है कि संविधान के प्रत्येक संशोधन विधेयक संसद के प्रत्येक सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा तथा उस सदन के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित किया जायेगा किन्तु यदि संशोधन (क) अनुच्छेद 54 से 55, 73, 162 या 241 में (ख) या अनुच्छेद 73, 162 में, (ग) अनुच्छेद 124 से 147, 214, 231, 241, (ग) अनुच्छेद 13 की कोई बात अनुच्छेद 368 के अधीन किये गये संशोधन को लागू नहीं होगी । इस प्रकार संशोधन की दृष्टि से संविधान के विभिन्न उपबन्धों को तीन भागों में विभाजित किया जाता है और प्रत्येक भाग के लिए पृथक् प्रक्रिया अपनाई गयी है । (1) साधारण बहुमत: इस श्रेणी में अनुच्छेद 4, 169 और 293-A आते ह...

हुजूम तो यही कहता है कि चन्दन जिला हिला देंगे।प्रसिद्ध यादव।

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 फुलवारी पश्चिमी से जिला परिषद के उम्मीदवार चन्दन पासवान को जिस तरह से हर पंचायत के हर गांवों से सभी समुदायों का समर्थन मिल रहा है, इससे यही प्रतीत होता है कि मैदान में कहीं लड़ाई है हीं नही, क्लीन स्विप चंदन के गले मे विजय की माला मिलने वाली है।यह सब चन्दन के व्यक्तिगत गुणों, व्यवहारों के चलते सम्भव हुआ है।ये कभी क्षेत्र से और लोगों से दूर नही हुए। इनका मृदुभाषी, कुशल व्यवहार के लोग कायल हैं। एन्टी कोमिनेन्सी वोट का सीधा सीधा फायदा इन्हें मिल रहा है।विरोधी के बारे में कुछ कहकर या बताकर कोई अपना कद नही गिराना चाहेगा। क्षेत्र में सौ फीसदी बदलाव की आसार हैं, यह मेरा दावा है और चंदन के ललाट पर ही जीत का चंदन लगेगा।

माँ के दरवार में आने वाले सच्चे भक्त कभी खाली नही जाते। सनोज यादव।

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 दानापुर पेठिया गली स्थित मां काली मंदिर में हुएभंडारे में सनोज यादव के साथ हजारों की संख्या में भक्तो ने प्रसाद ग्रहण किया। दानापुर: दानापुर पेठिया बाजार स्थित बंगले के पास दक्षिणेश्वरी मां काली बाड़ी मंदिर के पुजारी शशांक मिश्रा एवं गोलू बाबा के नेतृत्व में आज मां काली मंदिर के परिसर में भव्य भंडारा का आयोजित किया गया था।   गोलू बाबा के निमंत्रण पर मुख्य अतिथि के रूप में आज  प्रदेश भाजपा नेता भाई सनोज यादव ने मंदिर परिसर में पहुंचकर माता काली की दर्शन के बाद पूजा अर्चना करने के बाद पुजारी बाबा से तिलक लगवाने के बाद चुड़ी देकर उन्होंने सम्मानित किए और देशवासियों एवं दानापुर के लिए ‌खुशहाली अमन और शांति के लिए दुआ मांगी।   बीजेपी नेता भाई सनोज यादव ने कहा कि माता काली के द्वारा पर आने वाले सभी भक्तजन खाली कभी नहीं जाते है जो यहां आने वाले सच्चे भक्त मन से मां काली से मुरादें मांगते है मां काली अपने भक्तगणों की मुरादें पूरी करती है। इसी वजह से देश के कोने कोने से भक्तों का मंदिर में आना जाना लगा रहता है और दानापुर में मां काली की आशिर्वाद लोगों को प्राप्त होती है। ...

अम्बेडकर रोते हुए पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर किए थे।प्रसिद्ध यादव

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           याद रहेगा। कैसे बहुजनों के खिलाफ नॉटंकी करते थे रंगे सियार लोग। आज भी नही समझ रहे हैं और उसे ही मेकर समझ बैठे हैं जो असम्भव है। दलित अधिकारों के विरोधी क्यों बन गए बापू? महात्मा गांधी दलितों को दिए इन अधिकारों के विरोध में थे. महात्मा गांधी का मानना था कि इससे हिंदू समाज बंट जाएगा. महात्मा गांधी दलितों के उत्थान के पक्षधर थे लेकिन वो दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र और उनके दो वोट के अधिकार के विरोधी थे. महात्मा गांधी को लगता था कि इससे अछूत (दलित) हिंदू धर्म से अलग हो जाएंगे. हिंदू समाज और हिंदू धर्म विघटित हो जाएगा. इसके विरोध में पहले महात्मा गांधी ने अंग्रेज शासन को कई पत्र लिखे. लेकिन उससे भी बात नहीं बनी तो महात्मा गांधी ने पुणे की यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि वो अछूतों के अलग निर्वाचन के विरोध में अपनी जान की बाजी लगा देंगे. महात्मा गांधी के इस कदम से बाबा साहब भीमराव अंबेडकर दुखी थे. वो इसे अछूतों के उत्थान में मजबूत कदम मान रहे थे. अंग्रेजों ने अछूत समाज को अलग धर्म अलग समुदाय की पहचान देने की कोशिश की ...

संविधान की ताक़त को समझें। प्रसिद्ध यादव

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     जो संविधान को जलाते हैं और मनुस्मृति लाना चाहते हैं वो असम्भव है।बाबा साहेब अंबेडकर ने पुख्ता  व्यवस्था कर दिये हैं। अंधविश्वास, पोंगापंथियों, धर्म के ठेकेदारों, कथावाचकों से किसी को कोई शक्ति मिलने वाली नही है। एक मंदिर के पुजारी नही बन सकते चाहे वो नारी हो, किन्नर हो, पिछड़ा ही क्यों न हो, लेकिन संविधान मुखिया से लेकर सीएम, पीएम, राष्ट्रपति तक हमारे देश में महिला, कमजोर वर्ग के लोग बने हैं, फिर इसकी जानकारी नहीं रखना और इसे छोड़कर ढोंगियों के पीछे दौड़ना कहाँ की बुद्धिमानी है। हमारा संविधान सभी देशों के संविधान से बड़ा है। अमेरिका का संविधान तीन पन्नों में सिमट जाता है। इंग्लैंड वालों से संविधान मांगोगे तो वो पूछेंगे कि यह क्या होता है? पिछले सात दशक में देश के सामने बहुत सी कठिन परिस्थितियां आईं, लेकिन हमारा संविधान टस से मस नहीं हुआ। यही इसकी कामयाबी है। मुश्किल से मुश्किल दौर में अडिग खड़े रहना ही इसकी कामयाबी है। तो मुङो नहीं लगता कि अब कोई शक रह जाता है कि संविधान सबसे बड़ा है और सभी को इसका पालन करना पड़ेगा। जो ऐसा नहीं करेगा, उसके लिए भी संविधान में व्यवस्...

मजबूत चौकीदारों के बावजूद 61000 करोड़ रुपये का हुआ बैंक घोटाला! प्रसिद्ध यादव।

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           पीएम केयर्स फंड में खूब आया पैसा, लेकिन उसका हिसाब कोई नही ले सकता है। शायद अन्य उद्योगों की तरह पीएम का भी निजीकरण हो गया है।    पीएम के न खाएंगे, न खाने देंगे लोकप्रिय  कहावत के बावजूद बैंकों से लोग सिर्फ इतना खाये ही नही बल्कि, डिफॉल्टर खुशी खुशी विदेश भी प्रस्थान कर गए।करीब हर भारतीय के 470 रुपये हिस्सा पड़ता। देश के बहुत बड़े काम होते, लेकिन अब बढ़ती महंगाई से यही लगता है कि सरकार इसका बदला आमजन से ले रही है। वस्तुओं के दाम बढ़ाकर, कर बढ़ाकर अपनी खजाना भर रही है।पिछले पांच सालों में देश भर के बैंकों में कुल 389 घोटाले सामने आए हैं। 31 मार्च, 2017 तक, सरकारी बैंकों ने पिछले पांच सालों में 8,670 'ऋण धोखाधड़ी' मामलों की सूचना दी है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 612.6 डॉलर (9.58 अरब डॉलर) का नुकसान उठाया है। इस राशि में अब तक कुछ सौ करोड़ रुपये की बढ़ोतरी भी हुई। इन सभी छोटे-बड़े घोटालों को मिला दें तो देश को 61,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे डिफॉल्टर्स के चलते यह मुद्दा देश के सामने आया है। अगर द...