अम्बेडकर ने मनुस्मृति में क्यों आग लगाई थी ?
आज बहुजन उल्टे इसके गुलाम बनकर इसे ढो ही नहीं रहे हैं ,बल्कि ऐसे पाखंडियों को सत्ता शीर्ष पर बैठा रहे हैं । जिसकी बुनियाद नफरत ,झूठ ,जुमले हैं, उससे बहुजन कल्याण की उम्मीद करे तो उससे बड़ी मूर्खता क्या हो सकती है। गोदी मीडिया दिन रात झूठ फैला रही है। महंगाई, बेरोजगारी पर चर्चा नहीं होता है ।देश अभी चंडीगढ़, सूरत,त्रिपुरा मॉडल देखा है । मनुस्मृति मॉडल अंदर से लागू है और इस बार संविधान को खत्म कर पूर्णरूपेण लागू करने की षड्यंत्र है।मनुस्मृति जाति उत्पीड़न को संस्थागत बनाती है। यह समाज के एक वर्ग द्वारा बहुसंख्यक लोगों के ख़िलाफ़ उत्पीड़न और शोषण को उचित ठहराता है। यह तथाकथित उच्च जाति के लोगों द्वारा बहुसंख्यक लोगों के साथ भेदभाव को उचित ठहराता है। यह दलितों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार करने की वकालत करता है। यह जनता के विशाल बहुमत पर कुछ लोगों के वर्चस्व को कायम रखता है।डॉ अम्बेडकर ने मनुस्मृति के मंसूबों को समझा और 1927 में इसी दिन सार्वजनिक रूप से इसके प्रति अपना प्रतिरोध और विरोध दर्ज कराने के लिए इसे आग लगा दी थी। हम भी उनके...