सरकारी फाइलों में कैद भोगीपुर विद्यालय का पुनर्निर्माण: 100 वर्षीय समाजसेवी की सरकार को चुनौती !

    


 संस्थापक-संरक्षक एवं वयोवृद्ध समाजसेवी सुखदेव बाबू का अपील। 


​राजधानी पटना के पास स्थित संपतचक प्रखंड का उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भोगीपुर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। वर्षों से विद्यालय के जर्जर भवन के पुनर्निर्माण की फाइल सरकारी कार्यालयों की धूल फांक रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

​शिक्षा व्यवस्था पर मंडराता संकट

​इस विद्यालय में पढ़ने वाले लगभग 100 प्रतिशत बच्चे दलित, महादलित, पिछड़े एवं अति पिछड़े वर्ग के गरीब परिवारों से आते हैं। भवन की खस्ताहाल स्थिति न केवल बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़ा कर रही है, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनी हुई है।

​विधानसभा तक पहुंची गूंज, पर नतीजा शून्य

​इस मामले की गंभीरता को समझते हुए स्थानीय विधायक और बिहार विधानसभा के सचेतक अरुण मांझी ने कई बार सदन और प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे को उठाया। प्रशासन से लेकर विधानसभा तक मामला पहुंचने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होना, सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

​100 वर्षीय समाजसेवी की भावुक अपील

​इस कठिन परिस्थिति में एक उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं मिशन नौनिहाल सम्मान के संस्थापक-संरक्षक एवं वयोवृद्ध समाजसेवी सुखदेव बाबू। 100 वर्ष की आयु में भी वे क्षेत्र के नौनिहालों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

​सुखदेव बाबू ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर इस मामले में अविलंब हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है:

​"समाज के सबसे वंचित वर्ग के बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि सरकार निर्माण कराने में असमर्थ है, तो मुझे अनुमति दे, मैं अपने निजी संसाधनों से इस विद्यालय का निर्माण कराने को तैयार हूं।"

​ग्रामीणों में गहरा आक्रोश

​विद्यालय की इस उपेक्षा को लेकर स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका मानना है कि बच्चों की शिक्षा से बड़ा कोई सरकारी नियम नहीं हो सकता। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि राजनीतिक और प्रशासनिक देरी को खत्म कर, बच्चों के लिए आधुनिक और सुरक्षित स्कूल भवन का निर्माण अविलंब सुनिश्चित किया जाए।

​क्या सरकार इस 100 वर्षीय समाजसेवी के जज्बे को सम्मान देगी और इन गरीब बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए आगे आएगी? यह देखना बाकी है।

Comments

Popular posts from this blog

केवी स्कूल की छात्रा रास्ते से रहस्यमय परिस्थितियों में गायब, रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में मिले कपड़े और बस्ता! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

रहना नहीं देश वीराना है: मिथिलेश सिंह को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि और एक संकल्प की शुरुआत !

अलविदा! एक जन-नेता का सफर हुआ पूरा: प्रोफेसर वसीमुल हक़ 'मुन्ना नेता' नहीं रहे !