पूछो उस कुत्ते से !
26 अगस्त की बाढ़ में नेपाल का त्रिशूली बाज़ार तबाह होकर 'भूतिया शहर' बन गया, लेकिन एक कुत्ता वहीं शांत खड़ा रहा। इंसानों ने तुरंत मान लिया कि वह अपने मालिक का इंतज़ार कर रहा है, क्योंकि हम हर जानवर के अस्तित्व को केवल इंसानी सेवा और वफ़ादारी के चश्मे से ही देखते हैं।
जापान का हाचिको और रॉयल नेवी का कुत्ता 'जस्ट नूइसेंस' (जो रात में नशे में धुत नाविकों को सुरक्षित जहाजों तक पहुँचाता था) वफ़ादारी के बड़े प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन इंसान हमेशा मानता है कि जानवरों का जीवन उसकी ज़रूरतों के लिए ही है।
इंसान खुद को सोचने-समझने की क्षमता के कारण श्रेष्ठ मानता आया है और जानवरों को बिना अधिकारों की 'संपत्ति' समझता है। लेकिन विज्ञान (डार्विन के बाद से) यह स्पष्ट कर चुका है कि इंसानी दिमाग मौलिक रूप से जानवरों से श्रेष्ठ नहीं है।
तबाही के बीच बिल्कुल शांत (Stoic) खड़ा नेपाल का कुत्ता इंसानी सभ्यता के सामने एक आईना रख रहा है। सदियों से इंसानों के साथ रहते हुए इन बेजुबानों ने हमारे बुरे-से-बुरे कृत्यों को देखा है।
जानवर इंसानों के अधीन या उनकी सेवा के लिए नहीं हैं; इस धरती पर उनका भी स्वतंत्र अस्तित्व और अधिकार है।

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