कर्नाटक: बेंगलुरु से आगे बढ़कर कई आर्थिक इंजनों से सशक्त होता राज्य।

 



बेंगलुरु पर अत्यधिक जनसंख्या और बुनियादी ढांचे के दबाव को कम करने के लिए अन्य शहरों और क्षेत्रों को वैकल्पिक विकास केंद्रों के रूप में विकसित करना जरूरी है।

बियॉन्ड बेंगलुरु मॉडल: इस मॉडल का उद्देश्य बेंगलुरु की नकल करना नहीं, बल्कि प्रत्येक क्षेत्र (जैसे तटीय कर्नाटक, मैसूर, हुबली-धारवाड-बेलगावी आदि) की विशिष्ट ताकत और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर विकास करना है।

जून और अगस्त 2026 के दौरान हजारों करोड़ रुपये की कई औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से अधिकांश बेंगलुरु से बाहर योजनाबद्ध हैं और इनसे हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

स्थानीय अर्थव्यवस्था त्वरक कार्यक्रम (LEAP) के तहत पांच वर्षों में 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसका लक्ष्य पांच लाख रोजगार के अवसर पैदा करना है।

मैसूर को राज्य के दूसरे आईटी शहर के रूप में विकसित करने और अन्य समूहों में एआई, डेटा साइंस, उन्नत विनिर्माण और कृषि-तकनीक जैसी उभरती तकनीकों को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

औद्योगिक विकास के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण आवास और कृषि परिवर्तन को जोड़कर एक संपूर्ण व टिकाऊ आर्थिक मॉडल तैयार किया जा रहा है।

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