भारतीय उपभोक्ता वर्ग का बदलता स्वरूप ।।

   


पारंपरिक रूप से भारत के मध्यम वर्ग को देश की उपभोक्ता क्षमता का पैमाना माना जाता था, लेकिन अब यह वर्ग इतना विशाल और विविध हो चुका है कि इसे केवल एक सामान्य श्रेणी में नहीं देखा जा सकता। 

​मध्यम वर्ग का विस्तार: शीर्ष 100 शहरों के अध्ययन से पता चलता है कि मध्यम आय वाले परिवार (₹6-36 लाख वार्षिक आय) कुल परिवारों का 53% हो गए हैं और 2030-31 तक 60% तक पहुँच सकते हैं। 

​बदलती प्राथमिकताएँ: समान आय वाले परिवारों के बीच भी जीवनशैली, बचत और उपभोग के तौर-तरीकों में बड़ा अंतर है 

व्यवसायों और नीति निर्माताओं के लिए अब मुख्य चुनौती यह समझना है कि इस विविध वर्ग के भीतर लोग क्या और क्यों चुन रहे हैं। 

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