ब्रिक्स देशों ने अपनाई 'नई दिल्ली घोषणा' और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका।
संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार: नई दिल्ली घोषणा में संयुक्त राष्ट्र के "व्यापक सुधार" की मांग की गई है, जिसमें सुरक्षा परिषद में ब्राजील और भारत को बड़ी भूमिका दिलाने के लिए समर्थन भी शामिल है।
नागरिकों की सुरक्षा और चिंता: इसमें नागरिकों की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया गया है और पश्चिम एशिया में नागरिक बुनियादी ढांचे और परमाणु सुविधाओं पर हमलों पर "गहरी चिंता" व्यक्त की गई है, जो स्पष्ट रूप से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुए मिसाइल हमलों की ओर इशारा करता है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे: इस घोषणा में क्यूबा के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी की आलोचना की गई है और सूडान में हो रही हिंसा पर चिंता व्यक्त की गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इस समूह के गठन के 20 साल बाद, ब्रिक्स एक "विशिष्ट पहचान" के साथ अपनी युवावस्था में आ गया है, जिसका वैश्विक मंच पर किसी के खिलाफ होना उद्देश्य नहीं है।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और आम सहमति से आगे बढ़ते हैं, जो अमेरिका में ब्रिक्स को "पश्चिमी-विरोधी" समूह के रूप में आलोचना किए जाने के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बयान है।
पीएम मोदी ने जी-20 की तर्ज पर एक "ट्रोइका" प्रणाली बनाने का सुझाव दिया, ताकि समूह के आने वाले और जाने वाले राष्ट्रपतियों के बीच वार्ताओं में निरंतरता बनी रहे।

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