आतंकवाद का बदलता चेहरा और भारत की आतंकवाद-विरोधी रणनीति ।
वैश्विक सुरक्षा में बदलाव: 9/11 के हमलों और पिछले 25 वर्षों में वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारी बदलाव आया है, जिसमें आतंकवादी समूहों का बड़े संगठनों से बदलकर छोटे, स्वायत्त और 'लोन-वोल्फ' (अकेले हमला करने वाले) हमलों तक का सफर शामिल है।
भारत की रणनीति का विकास: भारत की आतंकवाद-रोधी नीति 1990 के दशक की शुरुआत में निष्क्रिय और रक्षात्मक प्रतिक्रिया (पाकिस्तान को सीधे सजा न देने की नीति) से बदलकर एक आक्रामक और साहसिक नीति में तब्दील हो गई है, जिसके तहत सीमा पार से समर्थित आतंकवाद को 'युद्ध का कृत्य' माना जाता है।
प्रमुख मोड़ और सर्जिकल स्ट्राइक: 2014 के बाद भारत के रुख में कड़ा बदलाव आया; उरी हमले के बाद सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक्स (2016) और पुलवामा हमले के बाद बालाकोट में हवाई हमले (2019) ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अब अपनी रणनीति के तहत दुश्मन के घर में घुसकर कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाता।
ऑपरेशन सिंदूर और नई राष्ट्रीय नीति: हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत केवल 96 घंटों में आतंकवादी ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया, और 23 फरवरी 2026 को भारत ने व्यापक 'राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति और रणनीति' (PRAHAAR) का अनावरण किया, जो "संपूर्ण-सरकार" और "संपूर्ण-समाज" के दृष्टिकोण पर आधारित है।
भारत की भविष्य की सुरक्षा रणनीति में नियंत्रण रेखा (LoC) के पार घुसपैठ को रोकना, आतंकवाद के वित्तीय तंत्र को तोड़ना और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर मजबूत आम सहमति बनाना शामिल है।

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