विष का प्याला और चढ़ता पाप: बेढना के उस खूनी जाम की कहानी। -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

    



कहते हैं कि पाप का घड़ा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, एक दिन उसके भरने का वक्त आ ही जाता है। जब इंसान के सर पर बदले की आग चढ़कर बोलने लगती है, तो विवेक की आँखें बंद हो जाती हैं। लेकिन वो यह भूल जाता है कि कानून और कुदरत के हाथ हमेशा जुर्म की गर्दन तक पहुँच ही जाते हैं।

पटना के शांत ग्रामीण इलाके बाढ़ के बेढना गांव में 30 अगस्त की शाम कुछ अलग नहीं लग रही थी। गांव के चार दोस्त—नीशू और उसके साथी—खुशनुमा माहौल में महफिल जमाने की तैयारी में थे। उन्हें क्या मालूम था कि जिस जाम को वो खुशी का जरिया समझ रहे हैं, उसमें मौत घुल चुकी है।

इस साजिश का ताना-बाना बुन रहा था लाली कुमार। लाली के दिल में पिछले दो-ढाई सालों से नफरत का जहर उबल रहा था। वजह थी नीशू का उसकी बहन के साथ प्रेम प्रसंग। ऊपर से नीशू और उसके साथियों के तंज और ताने लाली के जख्मों पर नमक का काम करते थे। प्रतिशोध की आग में अंधा हो चुका लाली अब सिर्फ सही मौके की तलाश में था।

लाली ने अपने साथी, सब्जी विक्रेता रुदल कुमार, और एक अन्य मददगार के साथ मिलकर एक खौफनाक योजना बनाई। बाजार से जहर खरीदा गया। लाली ने बड़े ही दोस्ताना अंदाज में चारों युवकों को शराब पीने का न्योता दिया। माहौल जम चुका था, लेकिन युवकों के पास पहुँचने से पहले ही शराब के उस प्याले में जहर मिला दिया गया था। चारों ने बेफिक्री में वो जहर पी लिया। कुछ ही घंटों में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और तड़प-तड़प कर चारों की जीवन-लीला समाप्त हो गई।

शुरुआत में लगा कि मामला पुरानी गवाही की रंजिश का है। लाली को लगा कि उसका गुनाह गांव की पगडंडियों और झूठी कहानियों के पीछे छिप जाएगा। लेकिन "पाप सिर चढ़कर बोलता है"—चाहे कोई कितनी भी सफाई से जाल बुने, सुराग पीछे छूट ही जाते हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार के निर्देशन में एसआईटी (SIT) और डीआईयू (DIU) की टीमें हरकत में आईं। पुलिस ने जब कड़ियों को जोड़ना शुरू किया, तो लाली का बनाया झूठ का महल ताश के पत्तों की तरह ढह गया। घटना के महज 48 घंटे के भीतर पुलिस की सख्त पूछताछ के आगे लाली टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

जहर की व्यवस्था करने वाले रुदल कुमार और मुख्य साजिशकर्ता लाली को सलाखों के पीछे भेज दिया गया, जबकि एक नाबालिग को निरुद्ध किया गया। विसरा और शराब के नमूने भले ही एफएसएल (FSL) जांच के लिए चले गए हों, लेकिन न्याय का चक्र घूम चुका था।

लाली ने जिसे अपनी जीत समझा था, वही उसके पतन का कारण बना। नफरत और प्रतिशोध के जिस रास्ते पर वो चला था, उसने चार चिराग बुझा दिए और खुद उसे जिंदगी भर के अंधेरे यानी जेल की कोठरी में धकेल दिया।

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