रामलला की तिजोरी, एयर मार्शल की ड्यूटी: जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का अनुभव आया मंदिर के काम! - शिवानंद तिवारी।
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चंदे की हेराफेरी क्या हुई, व्यवस्थापकों के तो मानो होश ही उड़ गए। घोटाले की जांच पूरी हुई, पुरानी कमेटी के चेहरे बदले, लेकिन असली 'मास्टरमाइंड्स' की सेहत पर रत्ती भर असर नहीं पड़ा। वे आज भी उतने ही सुरक्षित हैं जितने कल थे। असली चमत्कार तो इसके बाद देखने को मिला—चंदे की सुरक्षा का जिम्मा एक रिटायर्ड एयर मार्शल को सौंप दिया गया!
अब देश की जनता असमंजस में है कि इस फैसले पर ठहाका लगाए या सिर धुनकर रोए।
व्यवस्था का आलम तो देखिए—मंदिर के दानपात्र की चौकीदारी के लिए अब वही अनुभव चाहिए जो कभी पाकिस्तान से जंग में काम आया था। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान आसमान से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले अफसर को शायद अंदाज़ा भी नहीं होगा कि देश की सबसे बड़ी चुनौती सीमा पार नहीं, बल्कि मंदिर के भीतर चंदे की रसीदों को संभालना बन जाएगी।
यह फैसला चीख-चीखकर कह रहा है कि देश में प्रशासनिक अनुभव और ईमानदारी का अकाल पड़ चुका है। अब सिविल अफसरों या ईमानदार ट्रस्टियों के बस की बात नहीं रही कि वे चढ़ावे का हिसाब-किताब रख सकें। रामलला की तिजोरी इतनी संवेदनशील हो चुकी है कि वहां अकाउंटेंट नहीं, बल्कि फाइटर जेट उड़ाने वाला रणनीतिकार तैनात करना पड़ रहा है।
इसे कहते हैं डिजिटल इंडिया का 'डिफेंस मोड'। कल को अगर मंदिर में नारियल फोड़ने या प्रसाद बांटने के लिए भी किसी ब्रिगेडियर या नेवी कमांडर की तैनाती की खबर आ जाए, तो हैरान मत होइएगा—आखिर सुरक्षा से कोई समझौता कैसे किया जा सकता है!

Comments
Post a Comment