बिहार की राजनीति का नया समीकरण: जब तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए संजीव कुमार ने दी थी! कुर्बानी ।
कुल पंजीकृत शिक्षकों/मतदाताओं की संख्या लगभग 16,600 के आसपास है।
बिहार की सियासत में इन दिनों जातिगत समीकरणों से परे एक नई इबारत लिखी जा रही है। हाल ही में सामने आए राजनीतिक घटनाक्रम के अनुसार, राज्य की राजनीति में बदलाव की एक बयार बह रही है।
राजनीति का नया अध्याय और बड़ा कदम
तेजस्वी यादव का समर्थन: पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मजबूती के साथ खड़े संजीव कुमार ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए एक बड़ी राजनीतिक कुर्बानी दी थी ।
NDA का मोह त्याग: एक तरफ जहां राजनीतिक दलों में पारंपरिक समीकरणों पर जोर रहता है, वहीं इस कदम ने यह साबित किया है कि बदलाव के लिए बड़े फैसलों की जरूरत होती है, जहां एक ओर नेताओं ने पारंपरिक पाबंदियों को पीछे छोड़ा है।
भूमिहार-यादव समीकरण: बिहार की दो प्रमुख और मुखर जातियों—भूमिहार और यादव—के एक साथ आने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है।
क्या बदलेगा महासंग्राम का रुख?
सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब महागठबंधन के लोग एमएलसी चुनाव में पूरी ताकत से जीत हासिल कर पाएंगे और क्या बीजेपी के समर्थक या भूमिहार मतदाता भी इसमें कोई भूमिका निभाएंगे? यह समीकरण आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय करने की क्षमता रखता है।
बिहार के राजनीतिक गलियारों में इस तरह के समीकरण पारंपरिक जातिगत दीवारों को गिराने का काम कर रहे हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

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