छंटनी को लेकर चिंता जताना अभी जल्दबाजी: भारतीय श्रम बाजार की मजबूत स्थिति ।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) द्वारा की जा रही छंटनी (Pink Slips) की खबरों के बीच यह मानना जल्दबाजी होगी कि भारतीय श्रम बाजार संकट में है। हालिया वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और यहां का रोजगार बाजार इस उथल-पुथल से निपटने के लिए काफी हद तक सुरक्षित है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों में छंटनी और इसके दायरे: ऑरेकल, उबर और पेपैल जैसी टेक कंपनियों से शुरू हुई छंटनी अब सैमसंग जैसी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों तक फैलती नजर आ रही है, जिसका मुख्य कारण AI उद्योग की वजह से सेमीकंडक्टर की मांग बढ़ना और घरेलू उपकरणों के दाम प्रभावित होना है।
वैश्विक उथल-पुथल और तेल आपूर्ति में बाधाओं के बावजूद भारत का घरेलू बाजार और उपभोक्ता क्षेत्र मजबूत स्थिति में बना हुआ है। घरेलू उपभोक्ताओं पर केंद्रित भारतीय कंपनियों के पास वेतन और रोजगार को संभालने के लिए बड़ा सुरक्षा कवच (Payroll Cushion) मौजूद है।
कार्यालयों के लिए लीजिंग में रिकॉर्ड तेजी: भारत में ऑफिस-लीसिंग की गतिविधि में लगातार उछाल देखा जा रहा है। वर्ष 2025 में 83 मिलियन वर्ग फीट के रिकॉर्ड आंकड़े के बाद, चालू वर्ष की पहली छमाही में यह लीजिंग वॉल्यूम लगभग 38 मिलियन वर्ग फीट दर्ज किया गया है।
वैश्विक क्षमता केंद्र (GCCs) इस वर्ष की कुल लीजिंग गतिविधियों का लगभग 40% हिस्सा चला रहे हैं। अनुमान है कि 2030 तक ये केंद्र भारत में 30 लाख से अधिक पेशेवरों को रोजगार देंगे, जिसके तहत हर साल लाखों नए पद जुड़ेंगे।
वर्ष 2026 में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा की गई छंटनी तुलनात्मक रूप से काफी छोटी है और शुद्ध रोजगार का परिदृश्य स्थिर बना हुआ है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं का सामना करने में भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे अधिक लचीली नजर आती है, जिससे मध्यम अवधि में इसका नौकरी बाजार मजबूत बना रहेगा।

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