हिंदी दिवस विशेष: फुलवारी शरीफ के संस्थान में गूंजी राष्ट्रभाषा की महिमा, छात्रों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां।
फुलवारी शरीफ | अजीत
किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी संस्कृति से होती है, और संस्कृति की आत्मा उसकी भाषा होती है। इसी भावना और उत्साह के साथ हाल ही में फुलवारी शरीफ के एक प्रतिष्ठित संस्थान में 'हिंदी दिवस' बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष आयोजन ने न सिर्फ विद्यार्थियों में अपनी मातृभाषा के प्रति गौरव का भाव जगाया, बल्कि हिंदी की समृद्धि और विविधता को भी मंच पर जीवंत कर दिया।
🌟 कार्यक्रम की भव्य शुरुआत
समारोह की शुरुआत संस्थान के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह के प्रेरणादायी संबोधन से हुई। उन्होंने अपने संबोधन में:
हिंदी भाषा के महत्व और उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
भारतीय संस्कृति और साहित्य के विकास में हिंदी के अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया।
विद्यार्थियों को यह समझाया कि हिंदी केवल बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है।
छात्रों को दैनिक जीवन में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने और इसके प्रति सम्मान बनाए रखने की प्रेरणा दी।
🎭 विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक रंग
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत की गई सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रस्तुतियां रहीं। मंच पर विद्यार्थियों ने अपनी कला का जादू कुछ इस तरह बिखेरा कि सभी का मन मोह लिया:
कविता-पाठ: ओजस्वी और भावपूर्ण कविताओं के माध्यम से हिंदी के इतिहास और उसके गौरवशाली अतीत को याद किया गया।
नाटक और नृत्य: मनमोहक प्रस्तुतियों के जरिए राष्ट्र की एकता, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता में हिंदी की भूमिका को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया।
भाषण: वक्ताओं ने हिंदी भाषा के विकास यात्रा और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर बेबाक विचार रखे।
इस दौरान सहायक प्राध्यापक राकेश कुमार ने अपनी एक अत्यंत प्रभावशाली और सुंदर कविता सुनाई, जिसे उपस्थित सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों ने खूब सराहा और तालियों से उनका स्वागत किया।
🤝 गरिमामयी उपस्थिति और समापन संदेश
समारोह में संस्थान के सभी शिक्षकों और अधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति रही। इस अवसर पर डी.एल.एड. विभागाध्यक्ष एहतेशाम निजामी, राजीव कुमार सिंह, डॉ. नबील अहमद, मोहम्मद उमर, तहेरा खातून, ममता यादव और संतोष कुमार यादव सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ प्राध्यापक अरविंद कुमार सिंह के उद्बोधन के साथ हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों की सभी प्रस्तुतियों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा:
"हिंदी का सम्मान करना दरअसल अपनी मातृभाषा, अपनी संस्कृति और अपनी प्राचीन विरासत का सम्मान करना है। हमें इसके निरंतर प्रचार-प्रसार के लिए संकल्पित होना चाहिए।"
अंत में, सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस यादगार कार्यक्रम का सफलतापर्वक समापन किया गया। हिंदी दिवस का यह आयोजन सभी के दिलों में भाषा के प्रति प्रेम और सम्मान की एक नई अलख जगा गया।


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