डिग्री, अंग्रेजी और शराबबंदी: समस्तीपुर कांड से उठते बड़े सवाल।
विदेशी शराब के साथ पकड़ी गई थी नेहा झा ।
स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के 1st AC कोच में 75 लीटर विदेशी शराब के साथ पकड़ी गई नेहा झा का मामला केवल एक अपराध की खबर नहीं है, बल्कि यह बिहार के मौजूदा सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने पर एक गहरा कटाक्ष है। अंग्रेजी में बातचीत और फर्स्ट क्लास का लग्जरी सफर—पहली नजर में कोई सोच भी नहीं सकता था कि सूटकेस में करोड़ों का नेटवर्क या अवैध खेप छिपी है।
यह घटना दो मुख्य पहलुओं की ओर इशारा करती है:
शराबबंदी की वास्तविकता और फलता-फूलता समानांतर नेटवर्क: बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्करी का बाजार खत्म होने के बजाय और अधिक संगठित, शातिर और हाई-प्रोफाइल हो चुका है। पुलिस से बचने के लिए महंगे ट्रेन टिकट, महिलाओं का इस्तेमाल और पढ़ा-लिखा प्रोफाइल एक नया ट्रेंड बन चुका है। जब तक मांग और मोटा मुनाफा कायम है, तब तक सप्लाई के नए और शातिर रास्ते बनते रहेंगे।
बेरोजगारी का दबाव या शॉर्टकट की चाह: शिक्षित युवाओं का इस तरह के संगठित अपराध में शामिल होना बेरोजगारी की कड़वी सच्चाई को भी दिखाता है। हालांकि, डिग्री होने का मतलब यह नहीं कि हर गलत कदम की वजह सिर्फ लाचारी हो; कई बार जल्द अमीर बनने और बिना मेहनत के भारी मुनाफा कमाने की चाह भी युवाओं को दलदल में धकेल देती है।
केवल कड़े कानून बनाने से अपराध नहीं रुकते; जब तक पढ़े-लिखे युवाओं को सम्मानजनक रोजगार नहीं मिलेगा और शराबबंदी के नाम पर जमीनी स्तर पर लीक होती व्यवस्था ठीक नहीं होगी, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।
.jpeg)
Comments
Post a Comment