ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026: वैश्विक कूटनीति का नया केंद्र और मध्य पूर्व का बदलता रुख।
मूल रूप से 2001 में इस समूह को BRIC (दक्षिण अफ्रीका के बिना) कहा गया था, जिसकी कल्पना अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने की थी।
वर्ष 2010 में इसमें दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।
ब्रिक्स मीटिंग का औचित्य
ब्रिक्स (BRICS) समूह आज के समय में वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को बुलंद करने और एक न्यायसंगत, बहुध्रुवीय (Multipolar) विश्व व्यवस्था स्थापित करने का सबसे प्रभावी मंच बन चुका है।
वैश्विक वित्तीय सुधार: पारंपरिक पश्चिमी वित्तीय संस्थाओं (जैसे IMF और विश्व बैंक) के एकाधिकार को चुनौती देना और आपसी व्यापार के लिए स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा देना।
आर्थिक और तकनीकी सहयोग: आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना, डिजिटल इकॉनमी, इनोवेशन और डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना।
भू-राजनीतिक स्थिरता: आतंकवाद का मुकाबला करने, क्षेत्रीय संघर्षों को रोकने और वैश्विक शांति स्थापित करने के लिए साझा मंच तैयार करना।
अध्यक्षता और सदस्य देश
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी और अध्यक्षता भारत (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई दिल्ली के भारत मंडपम में) की जा रही है।
वर्तमान में इस प्रभावशाली समूह में कुल 11 देश शामिल हैं—
भारत ,ब्राजील , रूस ,चीन , दक्षिण अफ्रीका
EBC Financial Group
ईरान ,सऊदी अरब , संयुक्त अरब अमीरात , मिस्र ,
इथोपिया , इंडोनेशिया ( हाल ही में शामिल)
प्रमुख देशों का रुख
ईरान : ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बनने के बाद ईरान इस मंच का उपयोग पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने, आर्थिक अलगाव को तोड़ने और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए कर रहा है। शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान ने मध्य पूर्व में शांति और गाजा में युद्धविराम बनाए रखने का पुरजोर समर्थन किया है।
इराक : इराक सीधे तौर पर ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य नहीं है, लेकिन पश्चिम एशिया में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और ऊर्जा कूटनीति के कारण इराक की रुचि इस ब्लॉक के साथ आर्थिक जुड़ाव और विकास वित्त पोषण हासिल करने में लगातार बनी हुई है।
सऊदी अरब : ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक बाजार को संतुलित रखने वाला प्रमुख देश सऊदी अरब ब्रिक्स मंच के माध्यम से अपनी कूटनीतिक स्वायत्तता को साध रहा है। यह अमेरिका के साथ अपने पारंपरिक रिश्तों को बनाए रखते हुए ग्लोबल साउथ के साथ आर्थिक साझेदारी को भी मजबूत कर रहा है।
पाकिस्तान - पाकिस्तान ब्रिक्स की सदस्यता पाने के लिए औपचारिक रूप से उत्सुक रहा है, लेकिन समूह के आंतरिक नियमों, आम सहमति की अनिवार्यता और क्षेत्रीय कूटनीतिक समीकरणों (विशेषकर भारत के रुख) के कारण उसे अभी तक इस ब्लॉक में प्रवेश नहीं मिल पाया है।
ब्रिक्स का यह मंच दुनिया की आधी आबादी और ऊर्जा के प्रमुख केंद्रों को एक साथ लाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे रहा है।
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