एक राष्ट्र, एक समय ('One Nation, One Time') पहल: भारत के लिए एक समान मानक समय क्यों आवश्यक है?
केंद्र सरकार ने 'लीगल मेट्रोलॉजी (भारतीय मानक समय) नियम, 2026' अधिसूचित किया है। इसके तहत भारतीय मानक समय (IST) को पूरे देश में कानूनी, प्रशासनिक, वाणिज्यिक और अन्य सभी आधिकारिक कार्यों के लिए एकमात्र मानक समय संदर्भ बनाया गया है। यह नियम राजपत्र में प्रकाशन के 180 दिनों के भीतर लागू होगा ताकि विभाग और संस्थान अपनी प्रणालियों में आवश्यक बदलाव कर सकें।
एक समान समय संदर्भ की आवश्यकता
डिजिटल और प्रौद्योगिकी-आधारित प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के कारण सटीक और एकीकृत समय संदर्भ (Time Stamping) की आवश्यकता महत्वपूर्ण हो गई है। अलग-अलग समय स्रोतों का उपयोग करने से निम्नलिखित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समन्वय की समस्याएं आ सकती हैं:
वित्तीय एवं डिजिटल भुगतान: सटीक टाइम-स्टैम्पिंग के माध्यम से लेनदेन की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
परिवहन तंत्र: रेलवे, हवाई अड्डों और अन्य सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के बीच सटीक समन्वय।
संचार और पावर ग्रिड: दूरसंचार नेटवर्क, इंटरनेट सेवाओं और पावर ग्रिड सिस्टम का निर्बाध संचालन।
कानूनी एवं आपातकालीन सेवाएं: सरकारी रिकॉर्ड्स, अदालती प्रक्रियाओं और आपातकालीन सेवाओं में समय की सटीकता बनाए रखना।
पहल की पृष्ठभूमि और तकनीकी ढांचा
27 जनवरी 2025 को उपभोक्ता मामले विभाग ने 'मसौदा लीगल मेट्रोलॉजी (भारतीय मानक समय) नियम, 2025' अधिसूचित किया था। IST को समन्वित वैश्विक समय (UTC +5:30) पर आधारित किया गया है, जिसे CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) द्वारा उन्नत परमाणु घड़ियों और उपग्रह लिंक के माध्यम से बनाए रखा जाता है।
पहले कई दूरसंचार और इंटरनेट सेवा प्रदाता विदेशी समय स्रोतों (जैसे GPS) पर निर्भर थे। राष्ट्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना के सुचारू संचालन के लिए सभी नेटवर्क को IST के साथ सिंक्रनाइज़ करना अनिवार्य माना गया। इसके लिए CSIR-NPL, ISRO, IIT कानपुर, NIC, CERT-In, SEBI और रेलवे जैसे विभागों को शामिल करते हुए एक अंतर-मंत्रालयी समिति गठित की गई थी।
नए नियमों के मुख्य लाभ और प्रभाव
विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता में कमी: नए नियम विदेशी समय स्रोतों की जगह भारत की अपनी उपग्रह नौवहन प्रणाली 'NavIC' और अन्य अनुमोदित भारतीय समय स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देते हैं।
डिजिटल संप्रभुता और सुरक्षा: जुलाई 2026 में बेंगलुरु स्थित क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला में 'व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी' पर आधारित एक नेटवर्क शुरू किया गया। यह प्रणाली साइबर हमलों और डेटा हेरफेर के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर भारत की डिजिटल अवसंरचना को संप्रभु और सुरक्षित बनाती है।
अत्यधिक सटीकता: CSIR-NPL द्वारा NTP (नेटवर्क टाइम प्रोटोकॉल) सर्वर के माध्यम से मिलीसेकंड सटीकता और ISRO के NavIC उपग्रहों के माध्यम से नैनोसेकंड सटीकता के साथ समय का वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

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