ज़ूफार्माकोग्नोसी: जब जानवर स्वयं बनते हैं अपने चिकित्सक!

 




प्रकृति ने जीवों को केवल जीवन ही नहीं दिया, बल्कि स्वास्थ्य और उपचार का ज्ञान भी उनके सहज व्यवहार (Instinct) में समाहित किया है। विज्ञान की भाषा में इस प्रक्रिया को ज़ूफार्माकोग्नोसी (Zoopharmacognosy) कहा जाता है, जिसका सीधा अर्थ है—पशु-पक्षियों और अन्य जीवों द्वारा आत्म-उपचार (Self-medication) के लिए वनस्पतियों और प्राकृतिक तत्वों का उपयोग करना।

स्व-उपचार के अद्भुत उदाहरण

ओरंगुटान का देसी इलाज: इंडोनेशिया के मध्य कालीमंतन स्थित सेबंगु जंगल में ओरंगुटान 'ड्राकेना' (Dracaena) नाम के पौधे की पत्तियों को अपनी लार के साथ मिलाकर पेस्ट बनाते हैं। वे इस पेस्ट को शरीर पर लगाते हैं ताकि मांसपेशियों का दर्द, जोड़ों की अकड़न और त्वचा संबंधी समस्याएं दूर हो सकें।

शालपर्णी और चिंपैंजी: नाइजीरिया में चिंपैंजी 'डेस्मोडियम गैंगेटिकम' (Desmodium gangeticum या शालपर्णी) की पत्तियों को निगलकर अपनी त्वचा पर मौजूद परजीवियों से छुटकारा पाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि प्राचीन आयुर्वेद में भी महर्षि सुश्रुत जैसे वैद्यों ने इस पौधे का उपयोग दमा, बवासीर और टाइफाइड जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बताया है।

हाथी और अन्य जीव: आम हाथी कफ और कफ-संबंधी समस्याओं से राहत पाने के लिए ओरिगैनो (Oregano) की पत्तियों को चबाते हैं। वहीं बंदर, भेड़, कुत्ते और बिल्लियां अपने पेट के कीड़ों और परजीवियों को खत्म करने के लिए घास खाती हैं।

मिट्टी और मिट्टी के तत्व: जानवर केवल पौधे ही नहीं, बल्कि मिट्टी या क्ले (Clay) भी खाते हैं ताकि उनके पेट का दर्द या विषाक्तता दूर हो सके। इसे 'जियोफेगी' (Geophagy) कहा जाता है।

पौधे और ध्वनि के प्रति प्रतिक्रिया

वैज्ञानिक अध्ययनों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि भले ही पौधों में मनुष्यों की तरह तंत्रिका तंत्र (Nervous system) न हो, फिर भी वे अपने आसपास के वातावरण को महसूस करते हैं और कीटों के हमलों से अपना बचाव करने के लिए सुरक्षात्मक रसायन छोड़ते हैं।

इसके अलावा, जानवरों में संगीत और ध्वनि को समझने की अद्भुत क्षमता होती है।

बंदरों में संगीत के सुरों और ताल को पहचानने की क्षमता होती है।

शोध से साबित हुआ है कि सही प्रकार का संगीत बजाने से कुत्तों में तनाव, दिल की धड़कन और घबराहट कम होती है। इसलिए शेल्टर होम या पशु चिकित्सालयों में संगीत का उपयोग जानवरों को शांत करने के लिए एक प्रभावी जरिया बन सकता है।

मनुष्यों ने अपने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा का एक बड़ा हिस्सा प्रकृति और जानवरों के व्यवहार को देखकर सीखा है। ज़ूफार्माकोग्नोसी यह साबित करती है कि औषधि विज्ञान की जड़ें केवल प्रयोगशालाओं में ही नहीं, बल्कि जंगलों और जीवों के सदियों पुराने सहज ज्ञान में गहराई से समाई हुई हैं।








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