राम लखन सिंह यादव कॉलेज में "प्रेमचंद का साहित्य और आज का वंचित समाज" विषय पर परिचर्चा आयोजित!

 



पटना, 31 जुलाई: राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनीसाबाद, पटना में मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा का मुख्य विषय "प्रेमचंद का साहित्य और आज का वंचित समाज: दलित, शोषित और हाशिए के स्वर" तथा "21वीं सदी का भारत और प्रेमचंद का यथार्थ: क्या बदला और क्या आज भी वही है?" रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सुरेंद्र प्रसाद ने की, जबकि परिचर्चा का विषय प्रवेश प्रो. रोहित कुमार द्वारा कराया गया। पूरे कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन प्रो. प्रसिद्ध कुमार ने किया।

परिचर्चा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला:

प्रो. राय श्री पाल सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने समय की तमाम सामाजिक विसंगतियों पर करारा प्रहार किया था। उन्होंने 'निर्मला', 'गोदान' और 'पंच परमेश्वर' जैसी कालजयी कृतियों का उल्लेख करते हुए प्रेमचंद के सामाजिक चिंतन को रेखांकित किया।

प्रो. (डॉ.) शंकर प्रसाद शाह ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रेमचंद ने केवल साहित्य ही नहीं रचा, बल्कि अपने लेखन के माध्यम से इतिहास को सहेजने और संवारने का ऐतिहासिक कार्य किया।

प्रो. सत्येंद्र प्रसाद ने बताया कि प्रेमचंद ने समाज की हर ज्वलंत समस्या और जाति व्यवस्था की कुरीतियों पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने 'रंगभूमि', 'कफन' और 'बड़े घर की बेटी' जैसी रचनाओं का संदर्भ देते हुए उनके संदेश को स्पष्ट किया।

प्रो. रमेश कुमार ने प्रेमचंद के व्यक्तिगत जीवन के संघर्षों और उनकी तंगहाली का उल्लेख करते हुए उनके साहित्य पर पड़े इसके प्रभावों को उकेरा।

कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन प्रो. गुड़िया कुमारी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से प्रो. रामजीवण यादव, प्रो. आर. एन. उपाध्याय, डॉ. प्रो. एकता सिंह, प्रो. आरती कुमारी, प्रो. निधि, प्रो. अभय कुमार, प्रो. हरेंद्र कुमार, प्रो. कुमारी एकता, प्रो. अमित, प्रो. शैलेंद्र रंजन, प्रो. मनीष कुमार भारती, प्रो अशोक यादव , प्रो. रोहित भारती , इंदुभूषण यादव  व लिलि दास शामिल थे।

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