जे.एन.एल. कॉलेज में 'भारतीय मनोविज्ञान दिवस' पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित, छात्रों ने जाने भारतीय ज्ञान परंपरा के रंग!
पटना: जगत नारायण लाल (जे.एन.एल.) कॉलेज के काउंसलिंग सेल और मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 29 जुलाई 2026 को 'भारतीय मनोविज्ञान दिवस' का आयोजन बड़े ही उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिए एक विशेष भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्रों ने भारतीय मनोविज्ञान के इतिहास और इसमें दिग्गजों के योगदान पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में विषय की गहराई और भारतीय ज्ञान परंपरा पर विस्तार से चर्चा हुई।
भारतीय ज्ञान परंपरा और मनोविज्ञान का गहरा संबंध
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए काउंसलिंग सेल की नोडल ऑफिसर डॉ. किरण बाला ने भारतीय ज्ञान परंपरा में मनोविज्ञान की सदियों पुरानी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह भारतीय दर्शन और प्राचीन ज्ञान में मन, चेतना और व्यवहार को समझने के गहरे आयाम मौजूद हैं।
इसके बाद मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष एवं सहायक प्राध्यापिका डॉ. अर्चना भारती ने भारत में आधुनिक मनोविज्ञान के इतिहास और इसके विकास यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने डॉ. नरेंद्र नाथ सेन गुप्ता, डॉ. गिरीन्द्रशेखर बोस और डॉ. जे.पी. दास जैसे महान भारतीय मनोवैज्ञानिकों के अमूल्य योगदान को रेखांकित किया।
छात्रों ने प्रस्तुत किए विचार, दिग्गजों के योगदान को किया याद
भाषण प्रतियोगिता में कॉलेज के कई छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भारतीय मनोविज्ञान की नींव रखने वाले विचारकों के जीवन व कार्यों पर अपने विचार साझा किए:
डॉ. नरेंद्र नाथ सेन गुप्ता (भारतीय मनोविज्ञान के जनक): कुंदन और कोमल ने उनके शुरुआती योगदान और भारत में पहली मनोविज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना पर प्रकाश डाला।
डॉ. गिरीन्द्रशेखर बोस: प्रीति और अमृता ने भारत में मनोविश्लेषण (Psychoanalysis) के प्रसार में डॉ. बोस की भूमिका पर बात की।
डॉ. जे. पी. दास: कल्याणी, गुड़िया और सोनाली ने बुद्धिमत्ता (Intelligence) और संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के क्षेत्र में डॉ. दास के शोध को रेखांकित किया।
डॉ. दुर्गानंद सिंह: रजनी और ऋतिक ने सामाजिक और सांस्कृतिक मनोविज्ञान में डॉ. सिंह के उल्लेखनीय योगदान के बारे में बताया।
सफल मंच संचालन
पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन और अंत में सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापन अहम् सत्यम् द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। प्रतियोगिता के अंत में छात्रों के प्रयासों की सराहना की गई और उन्हें मनोविज्ञान के भारतीय दृष्टिकोण को और गहराई से पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

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