₹29 करोड़ के सामान पर ₹307 करोड़ का भुगतान! कैसे 'दस गुना' रेट पर खरीदा? वाह रे 'जीरो टॉलरेंस' की सरकार!

   

 


​बिहार के सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निबटारे के नाम पर किया गया यह घोटाला प्रशासनिक पारदर्शिता और ईमानदारी के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।

​आंकड़ों का बड़ा खेल: जहां बाजार भाव और कोटेशन के अनुसार इन्हीं चार वस्तुओं की कुल कीमत महज ₹29 करोड़ बैठती है, वहीं इन्हें 18% जीएसटी सहित ₹307 करोड़ जैसी भारी-भरकम राशि में खरीदा गया।

​दस गुना से ज्यादा की लूट: 75 लीटर का माइक्रोवेव डस्टबीन, जिसकी बाजार कीमत ₹1,550 थी, उसे ₹15,490 में खरीदा गया। इसी तरह 45 लीटर के डस्टबीन और बायोडिग्रेडेबल बैग्स की खरीद में भी खुलेआम जनता के पैसों की लूट की गई है।

​हाईकोर्ट की सख्ती: माननीय उच्च न्यायालय (चीफ जस्टिस वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ) ने इस जनहित याचिका पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। 19 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर जनता की नजरें टिकी हैं।

​आखिर जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को इस तरह दोनों हाथों से क्यों लुटाया जा रहा है? क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का नारा सिर्फ कागजी साबित होकर रह गया है? इन सवालों के जवाब और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई अब जनता की सबसे बड़ी मांग है।

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