जब 'छोटे सरकार' पर चला चक्रसुदर्शन: शिशुपाल बने अनंत सिंह की राजनीतिक विदाई की कहानी। -प्रो प्रसिद्ध कुमार।
'सौ गलतियां माफ़, पर जब हद पार हुई... तो चक्रसुदर्शन ने सब हिसाब चुकता कर दिया!'
बिहार की सियासत इन दिनों पौराणिक कथाओं के किसी दिलचस्प अध्याय सी प्रतीत हो रही है। ऐसा लग रहा है मानों महान साहित्यकार धर्मवीर भारती की प्रसिद्ध रचना ‘अंधा युग’ या महाभारत का कोई भूला-बिसरा प्रसंग सीधे पटना की गलियों में उतर आया हो। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह, जिन्हें उनके समर्थक और वे खुद गर्व से 'छोटे सरकार' व स्वयंभू महाराज समझते थे, उनका हश्र ठीक पौराणिक पात्र शिशुपाल जैसा हुआ है।
दृश्य एक: धृतराष्ट्र, गंधारी और अश्वत्थामा सी विवशता
पिछले कुछ महीनों से जनता दल यूनाइटेड (JDU) की स्थिति कुछ अजीब सी हो चली थी। पार्टी के भीतर का हाल कुछ ऐसा था कि मानों हुक्मरान धृतराष्ट्र की तरह सब कुछ जानते हुए भी अपनों के मोह में पश्चाताप की आग में सुलग रहे हों, गंधारी की भांति विलाप कर रही हो और पार्टी के भीतर का माहौल अश्वत्थामा की तरह विक्षिप्त हो चला था। यह सब हो रहा था अनंत सिंह रूपी 'शिशुपाल' के उन लगातार कुकृत्यों से, जिन्हें पार्टी अब तक सहन करने की मजबूरी पाल रही थी।
दृश्य दो: 101वीं गलती और चक्रसुदर्शन का चलना
पौराणिक कथाओं में जैसे ही शिशुपाल के अपराधों का घड़ा भर गया था और उसकी 101वीं गलती पूरी हुई थी, वैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का चक्रसुदर्शन चल पड़ा था। ठीक उसी तर्ज पर, बिहार में विधान परिषद (MLC) का चुनाव खत्म होते ही जेडीयू का राजनीतिक चक्रसुदर्शन घूम गया।
हालिया एमएलसी चुनाव में पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बगावत करना, पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ मोर्चा खोलना और विरोधी खेमे की बैसाखी बनना अनंत सिंह को भारी पड़ गया। परिणाम यह हुआ कि पति-पत्नी (अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी) दोनों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जेडीयू ने उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित करने के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष के पास उनकी विधायकी समाप्त करने की अनुशंसा भी भेज दी है।
नेताओं के तीखे बोल और बयानों के तीर
इस पूरी सियासी उठापटक के बाद बयानों के तीर भी खूब चल रहे हैं। जेडीयू विधायक श्याम रजक ने अनंत सिंह के इस पतन पर सटीक तंज कसते हुए कहा:
"जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल के 100 अपराधों को क्षमा करने के बाद दंड दिया था, ठीक उसी तरह पार्टी नेतृत्व भी अनंत सिंह की अनुशासनहीनता और गलतियों को लंबे समय से परख रहा था। जब उनकी गलतियों की सीमा और पराकाष्ठा पार हो गई, तब शीर्ष नेतृत्व ने यह कड़ा एक्शन लिया।"
श्याम रजक की यह टिप्पणी बताती है कि पार्टी के भीतर ‘छोटे सरकार’ के रसूख और मनमानियों का दौर अब मुकम्मल तौर पर समाप्त हो चुका है।
अब आगे क्या? राजनीतिक अस्तित्व पर मंडराता संकट
विधायकी पर तलवार: पार्टी द्वारा विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश के बाद अब संकट केवल दल से निकलने तक सीमित नहीं है, बल्कि विधायकी जाना भी तय माना जा रहा है। हालांकि, इससे नीतीश सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला, लेकिन 'छोटे सरकार' का राजनीतिक वजूद जरूर आईसीयू में पहुंच गया है।
राजद के दरवाजे बंद: जानकारों का मानना है कि इससे पूर्व राजद (RJD) के साथ भी इन्हों ने ऐसी ही राजनीतिक गद्दारी या असहयोग किया था। तब आरजेडी का संख्या बल कम होने या अन्य मजबूरियों के कारण उन पर फौरी कार्रवाई नहीं हुई थी। लेकिन अब राजद में भी उनके लिए सारे दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं—वहां की राजनीति ऐसी गलती दोबारा दोहराने से तौबा कर चुकी है।
जन सुराज का रुख: प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' पार्टी अपराधियों और दागियों को लेकर पहले से ही सख्त और असहज रुख रखती है। ऐसे में वहां भी उनके लिए कोई राजनीतिक जमीनिल पाना मुमकिन नहीं दिखता।
निष्कर्ष: एक ही चाबुक में निकली सारी हेकड़ी
अकेले दम पर राजनीति की बिसात जीतने का दावा करने वाले और खुद को सियासत का सिरमौर समझने वाले अनंत सिंह की हेकड़ी इस एक ही राजनीतिक चाबुक ने पूरी तरह निकाल कर रख दी है। हालात यह गवाही दे रहे हैं कि बाहुबल और धमक की यह सियासत अब अपने अंतिम अध्याय पर पहुंच चुकी है, और 'छोटे सरकार' का यह सियासी सफर अब हमेशा के लिए फिनिश होता नजर आ रहा है।
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