त्वरित सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ में पीछे छूटते मानवीय मूल्य।


 

आज के समय में हमने सुविधा और गति को ही अपने जीवन का पर्याय मान लिया है। हम किसी भी ऐसे काम को बेहतर मानते हैं जो जल्दी पूरा हो जाए। परंतु, हर मानवीय भावना और रिश्ते को जल्दबाजी में पूरा नहीं किया जा सकता। किसी के दुख को सुनने, उसमें सांत्वना देने और किसी रिश्ते में आपसी भरोसा कायम होने में समय लगता है। ठीक इसी तरह, एक बच्चे को यह अहसास कराने में भी वक्त देना पड़ता है कि वह हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है। जीवन की भागदौड़ में हमें यह समझना होगा कि गति से ज्यादा संवेदनशीलता जरूरी है।   

सुविधा और जल्दी होने वाले कामों को जीवन का पर्याय मान लिया गया है।   

हर मानवीय कार्य, जैसे दुख सुनना या भरोसा बनाना, जल्दबाजी में पूरा नहीं किया जा सकता।   

बच्चों को उनके महत्व का अहसास कराने और रिश्तों को सहेजने के लिए समय की आवश्यकता होती है।   


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