प्रसार भारती: क्या यह वास्तव में एक स्वतंत्र सार्वजनिक प्रसारक है?
क्या 'प्रसार भारती' (Prasar Bharati) अपनी स्थापना के उद्देश्यों पर खरी उतरी है। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने पर तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेडकर ने प्रसार भारती को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त और स्वायत्त बनाने का वादा किया था। हालांकि, वास्तविक स्थिति इसके विपरीत रही है।
प्रसार भारती अधिनियम, 1990 के कई महत्वपूर्ण प्रावधान (जैसे- धारा 13, 14 और 15) आज भी ठीक से लागू नहीं किए गए हैं, जिसके कारण यह संगठन प्रशासनिक और वित्तीय रूप से सरकार के नियंत्रण से बाहर नहीं निकल पाया है। ब्रॉडकास्टिंग काउंसिल का गठन न होना, बोर्ड में रिक्तियां और नौकरशाहों का वर्चस्व इसकी स्वायत्तता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। यूनेस्को और अन्य वैश्विक मानकों के विपरीत, भारत का यह राष्ट्रीय प्रसारक आज भी एक छद्म स्वायत्त संस्था (disguised pretender) बनकर रह गया है।
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