जम्मू-कश्मीर विधानसभा का राज्य बहाली प्रस्ताव और उत्पन्न राजनीतिक गतिरोध.
25 सितंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरद सत्र में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा राज्य के तत्काल और पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली का प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे 28 सितंबर को 62 मतों के बहुमत से पास कर दिया गया.
इस प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव और 2024 के विशेष दर्जे का संदर्भ भी शामिल किया गया, जिसके कारण भाजपा ने इसका कड़ा विरोध किया और सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) किया.
भाजपा का तर्क था कि राज्य के दर्जे से संबंधित प्रस्ताव के साथ 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव को जोड़ना पूरी तरह से अनावश्यक और आंतरिक तनाव को बढ़ावा देने वाला था.
इसके अतिरिक्त, इस बात को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हुआ कि कानून सचिव और मुख्य सचिव ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने संबंधी टिप्पणियों में इसे "सबज्यूडिद" (विचाराधीन मामला) बताया था, जिस पर मुख्यमंत्री ने नौकरशाही पर राज्य का दर्जा रोकने का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया.
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